दिसपुर: असम का काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट चर्चा में है। पीएम मोदी आज (18 जनवरी) इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि पूजन भी करेंगे। इसकी लागत 6,950 करोड़ रुपए है। इस प्रोजेक्ट के तहत NH-715 के कालियाबोर-नुमालीगढ़ सेक्शन को चार लेन का बनाना है। इस प्रोजेक्ट को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) से 1 अक्टूबर, 2025 को मंजूरी मिली थी।
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का मकसद क्या है?
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगा और इससे ऊपरी असम, खासकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया की कनेक्टिविटी सुधर जाएगी। इसकी वजह से जाखलाबन्धा और बोकाखाट में बाईपास बनाए जाएंगे, जो शहरों की भीड़ को कम करेंगे और स्थानीय लोगों का जीवन सरल हो सकेगा। इससे शहर के अंदर आवाजाही सुधरेगी। वहीं काजीरंगा पार्क के जानवरों की आवाजाही भी सुरक्षित हो सकेगी।
अभी चुनौतियां क्या हैं?
NH-715 (पुराना NH-37) का मौजूदा कालियाबोर-नुमालीगढ़ सेक्शन 2 लेन वाली एक सड़क है। जो नागांव जिले के जाखलाबन्धा और गोलाघाट जिले के बोकाखाट के घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरती है। इस हाईवे का बड़ा हिस्सा काजीरंगा नेशनल पार्क से होकर गुजरता है या पार्क की दक्षिणी सीमा के साथ-साथ चलता है।
मॉनसून के दौरान, जब काजीरंगा पार्क के अंदर पानी भरता है तो जंगली जानवर पार्क से निकलकर मौजूदा हाईवे को पार करके ऊंची कार्बी-आंगलोंग पहाड़ियों की ओर चले जाते हैं। इस वजह से हाईवे पर चौबीसों घंटे भारी ट्रैफिक रहता है और एक्सीडेंट होते हैं। इस दौरान जंगली जानवरों की भी मौत हो जाती है।
असम के लिए क्यों जरूरी है काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर?
जब काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का काम पूरा हो जाएगा तो इससे कनेक्टिविटी बहुत सुधर जाएगी। इसका असर ये होगा कि काजीरंगा नेशनल पार्क में टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार-औद्योगिक विकास के लिए नए रास्ते खुलेंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा और नए मौके भी पैदा होंगे। इससे क्षेत्र आर्थिक रूप से काफी तरक्की करेगा।
एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से इंसान और जानवरों के बीच होने वाला टकराव कम होगा और जानवरों की आवाजाही भी बिना रोकटोक हो सकेगी। ये प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा को और भी ज्यादा प्रभावी बनाएगा और इससे यात्रा का समय भी बचेगा और रोड एक्सीडेंट भी कम होंगे।
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से वन्यजीवों की बिना रुकावट आवाजाही हो सकेगी और यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी। कुल मिलाकर ये कॉरिडोर असम के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे मौजूदा कॉरिडोर पर ट्रैफिक कम होगा, सुरक्षा बेहतर होगी और गुवाहाटी, काजीरंगा नेशनल पार्क और नुमालीगढ़ के बीच सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी।


