यरूशलम: गाजा पर निगरानी के लिए अमेरिका द्वारा लाई गई पॉलिसी पर इजरायल अब बिफर पड़ा है। इजरायल ने इस पॉलिसी को अपनी नीतियों के खिलाफ बताते हुए घोर आपत्ति जताई है। दरअसल, गाजा में आगे की कार्रवाई की निगरानी के लिए अमेरिका द्वारा नेताओं की घोषणा पर आपत्ति जताई।
हमारी पॉलिसी के विपरीत
इजरायल ने कहा कि गाजा कार्यकारी समिति के गठन को लेकर उससे समन्वय नहीं किया गया और यह उसकी नीति के विपरीत है। इजरायल, अमेरिका का करीबी सहयोगी है। शनिवार को जारी एक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्रालय को विदेश मंत्री मार्को रुबियो से संपर्क करने का निर्देश दिया है।
समिति में इजरायली अधिकारी शामिल नहीं
व्हाइट हाउस द्वारा शुक्रवार को घोषित समिति में कोई भी इजरायली अधिकारी शामिल नहीं है, हालांकि इजरायल के एक व्यवसायी को जरूर शामिल किया गया है। अब तक घोषित अन्य सदस्यों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो सबसे करीबी विश्वासपात्र, ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक अमेरिकी जनरल और पश्चिम एशियाई सरकारों के कई शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि गाजा के लिए अमेरिका द्वारा तैयार की गई युद्धविराम योजना अब अपने चुनौतीपूर्ण दूसरे चरण में प्रवेश कर रही है।
ट्रंप की योजना के मुताबिक गाजा में अमेरिकी निगरानी वाले इलाकों में फिलिस्तीनी समिति शासन करेगी। इसका नेतृत्व पेशे से इंजीनियर और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व अधिकारी अली शात को सौंपा गया है। योजना के मुताबिक समिति की निगरानी की जिम्मेदारी ट्रंप के नेतृत्व वाला बोर्ड ऑफ पीस करेगा।
फिलिस्तीन समिति की पहली बैठक में क्या हुआ?
अमेरिका की पहल पर गठित फिलिस्तीन समिति की पहली बैठक शुक्रवार को काहिरा में हुई। इस दौरान समिति की अगुवाई कर रहे अली शात ने हालात में सुधार के लिए जल्द काम करने का वादा किया है। उन्होंने कहा पुनर्निमाण और पुनर्स्थापन में लगभग तीन साल का समय लगेगा।





