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Shri Radha Krishna Ashtakam: होली पर करें श्री राधा कृष्ण अष्टकम स्तोत्र का पाठ, जीवन की सभी दुख विपदाएं होंगी दूर

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Mar 03, 2026 11:24 pm IST,  Updated : Mar 03, 2026 11:24 pm IST

Shri Radha Krishna Ashtakam: होली के पावन अवसर पर राधा कृष्ण अष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से आपको जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही आपके जीवन की दुख-विपदाएं भी दूर होती हैं।

Shri Radha Krishna Ashtakam- India TV Hindi
श्री राधा कृष्ण अष्टकम Image Source : FREEPIK

Shri Radha Krishna Ashtakam: होली का राधा-कृष्ण से गहरा संबंध है। मथुरा-वृंदावन में होली की धूम भी दुनिया से अलग होती है। यहां लठमार होली से लेकर फूलों की होली तक रंगों का त्योहार लंबे समय तक माना जाता है। होली का त्योहार ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण के अटूट बंधन को भी दर्शाता है। ऐसे में होली वाले दिन राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए अगर आप राध-कृष्ण अष्टकम स्तोत्र का पाठ करते हैं तो आपके जीवन के सभी दुख-विपदाएं दूर हो सकती हैं। साथ ही इस स्तोत्र का पाठ करने से राधा-कृष्ण का असीम आशीर्वाद भी आपको प्राप्त होता है। 

श्री राधा कृष्ण अष्टकम 

चथुर मुखाधि संस्थुथं, समास्थ स्थ्वथोनुथं।

हलौधधि सयुथं, नमामि रधिकधिपं॥

भकाधि दैथ्य कालकं, सगोपगोपिपलकं।

मनोहरसि थालकं, नमामि रधिकधिपं॥

सुरेन्द्र गर्व बन्जनं, विरिञ्चि मोह बन्जनं।

वृजङ्ग ननु रञ्जनं, नमामि रधिकधिपं॥

मयूर पिञ्च मण्डनं, गजेन्द्र दण्ड गन्दनं।

नृशंस कंस दण्डनं, नमामि रधिकधिपं॥

प्रदथ विप्रदरकं, सुधमधम कारकं।

सुरद्रुमपःअरकं, नमामि रधिकधिपं॥

दानन्जय जयपाहं, महा चमूक्षयवाहं।

इथमहव्यधपहम्, नमामि रधिकधिपं॥

मुनीन्द्र सप करणं, यदुप्रजप हरिणं।

धरभरवत्हरणं, नमामि रधिकधिपं॥

सुवृक्ष मूल सयिनं, मृगारि मोक्षधयिनं।

श्र्वकीयधमययिनम्, नमामि रधिकधिपं॥

स्तोत्र

वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम्।

सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम्॥

राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम्।

राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम्॥

राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम्।

राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम्॥

राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम्।

राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम्॥

ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम्।

तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम्॥

निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम्।

नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम्॥

यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम्।

योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्॥

बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम्।

वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम्॥

योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्।

गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः।

इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम्॥

हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम्।

पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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