यरूशलेम: इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ जो कार्रवाई की, उससे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई। ऐसे में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है कि खामेनेई की लोकेशन पता करने के लिए इजरायल ने सालों तक ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया था।
ANI ने लंदन स्थित फाइनेंशियल टाइम्स की एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इजरायल की जासूसी एजेंसियों द्वारा रची गई एक लॉन्ग टर्म योजना का खुलासा हुआ है, जिसके कारण ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और ईरान की सेना के शीर्ष नेतृत्व के सदस्यों की लक्षित हत्याएं हुईं।
फाइनेंशियल टाइम्स ने कई सूत्रों का हवाला देते हुए बताया है कि इजरायल ने खामेनेई और उनके सुरक्षाकर्मियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया और मोबाइल फोन नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त करने में कई साल बिताए। तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को सालों से हैक किया गया था और फ़ुटेज को एन्क्रिप्ट करके सर्वरों पर भेजा गया था। इस हैक ने इजरायली और अमेरिकी सेनाओं को खामेनेई के ठिकाने का सटीक पता लगाने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप एक लक्षित हमले में उन्हें मार गिराया गया।
यानी मतलब तो साफ है कि अगर इजरायल, ईरान के ट्रैफिक कैमरों को सालों से हैक किए हुए था तो वह निश्चित ही कुछ बड़ा करने की योजना बना रहा था। ट्रैफिक कैमरों की फुटेज से ये जानने की कोशिश की जा रही थी कि ईरान के बड़े और जिम्मेदार लोग कहां जाते हैं और किससे मिलते हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालही में फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ईरान पर हुए हमलों को जायज ठहराया और कहा कि इस्लामी शासन अमेरिका को नष्ट करने पर तुला हुआ है। उन्होंने कहा, "ईरान 47 वर्षों से 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगा रहा है। उन्होंने आपके दूतावासों पर बमबारी की। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दो बार हत्या करने की कोशिश की। उन्होंने अपने ही लोगों की हत्या की, अनगिनत लोगों का नरसंहार किया। और उन्होंने दुनिया भर में आतंक का जाल फैलाया। यह एक ऐसा शासन है जो संयुक्त राज्य अमेरिका को नष्ट करने पर तुला हुआ है।"
हालही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके और इसके लिए ईरानी शासन की मानसिकता में मौलिक बदलाव की आवश्यकता थी। उन्होंने कार्रवाई करने का फैसला किया क्योंकि उन्हें लगा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक था।
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