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रिपोर्ट: ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, खामेनेई के बेटे मोजतबा संभालेंगे देश की कमान, जानें उनके बारे में

Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd Published : Mar 04, 2026 07:35 am IST, Updated : Mar 04, 2026 07:41 am IST

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। ऐसे में उनके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश की कमान सौंपी गई है और उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया है। ईरान इंटरनेशनल ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है।

Mojtaba Khamenei- India TV Hindi
Image Source : AP मोजतबा खामेनेई

तेहरान: ईरान से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। ईरान को अपना नया सुप्रीम लीडर मिल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर चुना गया है। ईरान इंटरनेशनल ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया, "विशेषज्ञों की सभा ने अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को अगला सर्वोच्च नेता चुना है।"

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोजतबा का चुनाव ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के दबाव में हुआ था।

गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की ज्वाइंट कार्रवाई में सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद से ही सुप्रीम लीडर के पद की दौड़ में मोजतबा खामेनेई का नाम काफी आगे चल रहा था। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर के पास ही युद्ध, शांति और देश के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम सहित देश के प्रमुख निर्णयों पर अंतिम अधिकार है। 

मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

मोजतबा खामेनेई ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई के बेटे हैं। मोजतबा की उम्र 56 साल है और वह एक शिया धर्मगुरु हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से उनके घनिष्ठ संबंध हैं, हालांकि उन्होंने कभी भी निर्वाचित या औपचारिक सरकारी पद ग्रहण नहीं किया है।

वरिष्ठ धर्मगुरु का पद या आधिकारिक पद न होने के बावजूद, हमेशा से ये माना जाता रहा है कि मोजतबा का व्यवस्था के भीतर पर्दे के पीछे से काफी प्रभाव रहा है।

मोजतबा के बारे में एक जरूरी बात ये भी है कि जब ईरान-इराक युद्ध हुआ था तो उन्होंने ईरानी सशस्त्र बलों में सेवा की थी। 2019 में, अमेरिकी वित्त विभाग ने उन पर प्रतिबंध लगा दिए थे और कहा था कि उन्होंने अपने पिता की ओर से आधिकारिक तौर पर कार्य किया, जबकि वे कभी निर्वाचित या औपचारिक रूप से नियुक्त नहीं हुए थे। 

खामेनेई शायद खुद ये नहीं चाहते थे

हैरानी की बात ये है कि खामेनेई ने पिछले साल तैयार किए गए संभावित उत्तराधिकारियों की संक्षिप्त सूची से अपने बेटे को बाहर कर दिया था। दरअसल इसके पीछे की एक बड़ी वजह ये भी थी कि ईरान के शिया धार्मिक प्रतिष्ठान के भीतर, पिता से पुत्र को सत्ता हस्तांतरण ठीक नजर से नहीं देखा जाता।

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