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क्या 6G की रेस में पिछड़ रहा भारत? रिपोर्ट में बड़ा दावा, अमेरिका और चीन का रहेगा दबदबा

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : May 28, 2026 06:45 pm IST,  Updated : May 28, 2026 06:45 pm IST

हाल में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत 6G की रेस में दुनिया के 9 देशों से पिछड़ जाएगा। वहीं, अमेरिका और चीन इस मामले में ग्लोबल लीडर बन सकते हैं।

6G in India- India TV Hindi
क्या 6जी में पिछड़ जाएगा भारत? Image Source : UNSPLASH

5G के बाद अब दुनियाभर में 6G के लिए तैयारियां चल रही है। भारत भी उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां 6G की टेस्टिंग के लिए काम किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए 6G टेस्ट भी बनाने की घोषणा की है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दावा किया है कि भारत उन चुनिंदा देश में शामिल होगा, जहां सबसे पहले 6G सर्विस शुरू होगी। हालांकि, हाल में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि भारत 6G सर्विस में अमेरिका, चीन समेत कई देशों से पिछड़ सकता है।

टॉप-9 देशों मे भारत का नाम नहीं

रिसर्च फर्म Juniper ने अनुमान लगाया है कि 2029 में दुनिया में 6G सर्विस शुरू हो जाएगी। सर्विस लॉन्च होते ही 6G कनेक्शन की संख्यां 46 लाख तक पहुंच जाएगी। वहीं, 2030 तक चीन 6G सर्विस में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बनेगा। वहीं, अमेरिका और दक्षिण कोरिया में 6G सर्विस सबसे पहले लॉन्च होगी। रिसर्च फर्म ने 6G सर्विस लॉन्च करने वाले टॉप 9 देशों में भारत को नहीं रखा है। इसका मतलब है कि भारत 6G सर्विस शुरू करने वाले टॉप 10 देशों में तो शामिल है, लेकिन यहां अमेरिका, चीन समेत कई देशों के बाद यह सर्विस शुरू होगी।

क्या कहती है Juniper की रिपोर्ट?

रिसर्च फर्म का कहना है कि 2029 तक दुनियाभर में 6G कनेक्शन की संख्यां 46 लाख तक पहुंच  जाएगी। इसकी शुरुआत अमेरिका और दक्षिण कोरिया में होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक चीन 6G सर्विस वाला सबसे बड़ा मार्केट बन जाएगा। इसके बाद अमेरिका और कनाडा 6G सब्सक्राइबर्स वाले बड़े देश होंगे।

रिपोर्ट में जिन टॉप-9 देशों को रखा गया है उनमें साउदी अरब, फ्रांस, कतर, ब्रिटेन, जापान भी शामिल हैं। हालांकि, रिसर्च में ये दावा किया गया है कि 6G के कमर्शियल लॉन्च करने वाले देशों के अलावा जर्मनी, भारत, UAE जैसे देश इसके विकास और विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगे। इसमें यह भी दावा किया गया है कि 2035 तक दुनिया में 6G यूजर्स की संख्यां 2.9 अरब तक पहुंच सकती है।

5G से कितना अलग?

6G में टेराहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाएगा, जो 5G के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्रिक्वेंसी के मुकाबले बहुत ज्यादा है। यह तरंगे बिजली की रफ्तार से डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम होंगी। इसके अलावा यह पूरी तरह से AI नेटिव बेस्ड नेटवर्क होगा, जो खुद के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करेगा। इसमें इंटिग्रेटेड सोर्सिंग एंड कम्युनिकेशन (ISAC) मिलेगा। यह बहुत ही एडवांस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड कम्युनिकेशन सर्विस होगी।

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