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खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका में महंगा हुआ पेट्रोल, रातों-रात बढ़ गई कीमतें

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 03, 2026 11:46 pm IST,  Updated : Mar 03, 2026 11:46 pm IST

युद्ध के कारण इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।

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खाड़ी देशों में बिगड़ते हालात की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी Image Source : AFP

ईरान पर हमले की शुरुआत करने वाले देश अमेरिका में पेट्रोल महंगा हो गया है। अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट बढ़कर लगभग 3.11 डॉलर हो गई है। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA)' ने ये जानकारी दी। बताते चलें कि अमेरिका का 1 गैलन लगभग 3.78 लीटर के बराबर होता है। यानी, इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अमेरिका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 75.69 रुपये हो गई है। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने से पहले ही पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही थीं, क्योंकि तेल कंपनियां गर्मियों के लिए अलग तरह का फ्यूल तैयार कर रही हैं।

खाड़ी देशों में बिगड़ते हालात की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी

लेकिन, युद्ध के कारण इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमले हैं, जिनमें सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास पर किया गया ड्रोन हमला भी शामिल है। अमेरिका के प्रमुख कच्चे तेल की कीमत 8.6 प्रतिशत बढ़कर 77.36 डॉलर प्रति बैरल हो गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 6.7 प्रतिशत बढ़कर 81.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। खाड़ी देशों में युद्ध के कारण कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई बाधित होने की चिंता के कारण सप्ताह की शुरुआत में वैश्विक तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया।

भारत के पास उपलब्ध है पर्याप्त कच्चा तेल

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद मिडिल-ईस्ट का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की उपलब्धता पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, भारत के लिए स्थिति अभी पूरी तरह से कंट्रोल में हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत के पास 25 दिनों का क्रूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात करने के लिए दूसरे सोर्स ढूंढ रही है। उधर, कतर ने भी ईरान के ड्रोन हमले के बाद एलएनजी का उत्पादन रोक दिया है।

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