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ट्रम्प का बड़ा ऐलान, 'अब हम हैं होर्मुज के गार्जियन, जहाजों से अमेरिका वसूलेगा 20% टैक्स'

 Published : Jul 13, 2026 11:51 pm IST,  Updated : Jul 14, 2026 12:01 am IST

ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका, होर्मुज में ईरान पर फिर से पूर्ण आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी लागू कर रहा है। इस व्यस्त समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी मालवाहक जहाजों की सुरक्षा के एवज में अमेरिका अब 20 फीसदी का सुरक्षा शुल्क वसूलेगा।

Donald Trump- India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का गार्जियन है। इसके साथ ही ईरान पर फिर से आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी लागू कर दी गई है। ट्रंप ने साफ किया है कि इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की सुरक्षा के एवज में अमेरिका 20 फीसदी का 'सुरक्षा शुल्क' वसूलेगा।

ईरान के जहाज़ अब होर्मुज से गुज़र नहीं पाएंगे 

ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर कहा कि ईरान के जहाज़ अब होर्मुज से गुज़र नहीं पाएंगे और अमेरिका 20 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने कहा, ''हम ईरान की नाकेबंदी फिर लागू कर रहे हैं। इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह सिर्फ़ ईरान के जहाज़ों या ग्राहकों को आने-जाने से रोकती है। बाकी सभी देश इस रास्ते का निष्पक्ष और खुला इस्तेमाल कर सकेंगे।'' 

दोनों देशों ने होर्मुज पर कंट्रोल का किया दावा

अमेरिका और ईरान दोनों ने सोमवार को दावा किया कि होर्मुज  पर उनका नियंत्रण है। इस घटनाक्रम ने युद्ध समाप्त करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। तनाव उस समय और बढ़ गया जब रविवार को ईरान ने ओमान के तट के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। इस हमले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आवाजाही के लिए अहम इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

ट्रंप ने सोमवार को 'फॉक्स न्यूज' से कहा, ''होर्मुज पर हमारा नियंत्रण है।'' ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को 11 घंटे चली बैठक में ''सभी बातों पर सहमति बन गई थी'', लेकिन बाद में ईरानी वार्ताकारों ने कुछ बदलावों का सुझाव दिया। उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही फारस की खाड़ी के इस संकरे समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है। ईरान ने व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर और शिपिंग कंपनियों को डराकर इस मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश की है। 

ईरान के दर्जनों ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 60 दिन के अंतरिम समझौते की अवधि लगभग आधी पूरी हो चुकी है। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध के स्थायी समाधान के लिए वार्ता शुरू करना था, लेकिन इसके बजाय होर्मुज और इसके भविष्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने बताया कि सोमवार को किए गए हमलों में उसने दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार केंद्र, मिसाइल और ड्रोन संबंधी उपकरण तथा छोटी नौकाएं शामिल हैं। सेंटकॉम ने कहा, ''होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।'' 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारा क्षेत्र-रिवोल्यूशनरी गार्ड

ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज किया। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर इसी बल का नियंत्रण है। गार्ड ने कहा, '' स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारा क्षेत्र है और हम दुनिया के दूसरे छोर से आई एक बेलगाम तथा बच्चों की जान लेने वाली सेना को अपना अवैध हस्तक्षेप जारी रखने की अनुमति नहीं देंगे।'' इस बीच, सोमवार को बहरीन में तीन बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है। वहीं, कुवैत ने भी कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोक दिया। हालांकि, दोनों देशों में किसी नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली। जॉर्डन ने सोमवार को कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गईं चार मिसाइलों को मार गिराया।इस घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई नुकसान हुआ।

अमेरिकी हमले में दो लोगों की मौत

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि होर्मुजगान, खुजेस्तान और मरकजी प्रांतों में हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में भी हमले किए गए हैं। रविवार को ईरान के हमलों का दायरा बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और यहां तक कि ओमान तक फैल गया। ओमान के साथ साझा समुद्री सीमा वाला होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस तनाव का केंद्र बना रहा। 

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