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Explainer: क्या ईरान में होगी राजशाही की वापसी? रेजा पहलवी अचानक क्यों हुए एक्टिव? समझें सारे समीकरण

ईरान में आर्थिक संकट और आज़ादी पर पाबंदियों के खिलाफ बड़े प्रदर्शन जारी हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने आंदोलन का खुला समर्थन किया है और खुद को विपक्ष के चेहरे के रूप में पेश किया है। ऐसे में राजशाही की वापसी की चर्चा तेज हो गई है।

Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Jan 09, 2026 01:48 pm IST, Updated : Jan 09, 2026 02:08 pm IST
निर्वासित क्राउन...- India TV Hindi
Image Source : AP निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने ईरान में विरोध की आग को और भड़का दिया है।

Reza Pahlavi and Iran Protests | ईरान इन दिनों एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं, क्योंकि अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है, महंगाई आसमान छू रही है और लोगों की आजादी पर पाबंदियां लगी हुई हैं। इन प्रदर्शनों के बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अपना खुला समर्थन दिया है और यूरोपीय नेताओं से अपील की है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह ईरानी लोगों का साथ दें। अब सवाल यह है कि रेजा पहलवी अचानक क्यों एक्टिव हो गए हैं? आइए, समझने की कोशिश करते हैं।

आखिर कौन हैं रेजा पहलवी?

ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के बीच रेजा पहलवी अचानक एक्टिव हो गए हैं। वह ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में हुआ था। वे 1967 में क्राउन प्रिंस बने, और 1978 में पायलट की ट्रेनिंग के लिए अमेरिका गए, लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति से राजशाही खत्म हो गई और वे वापस नहीं लौट सके। तब से वे अमेरिका में निर्वासन में रहते हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान की डिग्री ली और जेट पायलट बने। रेजा पहलवी पिछले 4 दशकों से ईरान में लोकतंत्र, मानवाधिकार और धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए आवाज उठाते आए हैं। वे वर्तमान इस्लामिक रिपब्लिक का विरोध करते हैं और शांतिपूर्ण बदलाव की वकालत करते हैं।

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Image Source : PUBLIC DOMAIN
ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेजा पहलवी अपनी पत्नी की सिगरेट जलाते हुए।

सेना से पहलवी ने क्या कहा?

रेजा पहलवी ने ईरान की सेना से कहा है कि वे तय करें कि वे 'इतिहास के किस तरफ' खड़े होना चाहते हैं, जुल्म करने वालों (ईरान की इस्लामी सरकार) के साथ या लोगों के साथ। उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक का पतन तय है, और यह सिर्फ़ समय की बात है। उन्होंने सुरक्षाबलों से अपील की है कि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपने हथियारों का इस्तेमाल न करें, बल्कि उनकी रक्षा करें। आंदोलन के प्रति सहानुभूति रखने वाले सैनिकों से संपर्क के लिए पहलवी ने 6 महीने पहले एक प्लेटफॉर्म भी बनाया था। पहलवी का कहना है कि अब तक हजारों लोग वहां रजिस्टर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि ईरान की सेना में भी कुछ लोग पहलवी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं और यह ईरान की मौजूदा सत्ता के लिए चिंता की बात हो सकती है।

'लाखों ईरानी आजादी मांग रहे'

पेरिस से जारी एक बयान में रेजा पहलवी ने कहा कि ईरान सरकार ने सभी संचार माध्यम बंद कर दिए हैं, इंटरनेट काट दिया है और यहां तक कि सैटेलाइट सिग्नल जाम करने की कोशिश की है। उन्होंने ट्रंप को 'फ्री वर्ल्ड का लीडर' कहा और यूरोपीय नेताओं से कहा कि वे चुप्पी तोड़ें। उन्होंने कहा, 'लाखों ईरानी आजादी मांग रहे हैं। जवाब में सरकार ने सभी संचार माध्यम काट दिए। इंटरनेट बंद, लैंडलाइन कट और सैटेलाइट जाम करने की कोशिश की है। मैं फ्री वर्ल्ड के लीडर प्रेसिडेंट ट्रंप को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने सरकार को जवाबदेह बनाने का वादा दोहराया है। अब यूरोपीय नेता भी उनका साथ दें। मेरे बहादुर साथियों की आवाज न दबने दें।'

अमेरिका भी समर्थन में उतरा

अमेरिका भी आंदोलन कर रहे ईरान के लोगों के साथ खड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर जुल्म किए तो उसे अमेरिका का हमला झेलना पड़ेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ है, जो अपनी आजादी के लिए लड़ रहे हैं। ईरान की जनता के द्वारा किए जा रहे ये प्रदर्शन रेजा पहलवी के की अपील के बाद और तेज हो गए हैं। हजारों लोग तेहरान की सड़कों पर उतर चुके हैं। और इसी के साथ अब इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि क्या रेजा पहलवी के लिए ईरान में नई संभावनाएं पनप रही हैं, और राजशाही का रास्ता साफ हो रहा है?

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ईरान की इस्लामिक क्रांति के दौरान मोहम्मद रेजा शाह के बुत को उखाड़ते प्रदर्शनकारी।

ईरान में राजशाही का इतिहास

ईरान की राजशाही की कहानी हजारों साल पुरानी है, लेकिन आधुनिक दौर में पहलवी राजवंश की बात करें तो ये 1925 में शुरू हुई। निर्वासित क्राउन प्रिंस के दादा रेजा शाह पहलवी, जो एक सैनिक थे, ने 1921 में तख्तापलट किया और कज्जार राजवंश को हटा दिया। उन्होंने खुद को शाह घोषित किया और देश को आधुनिक बनाने की कोशिश की। शिक्षा, कानून और महिलाओं के अधिकारों में सुधार बड़े किए। लेकिन उनके शासन में तानाशाही भी खूब थी और ट्रेड यूनियन, राजनीतिक पार्टियों एवं प्रेस पर पाबंदी थी। 1941 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन और USSR ने ईरान पर कब्जा कर लिया। रेजा शाह को निर्वासन में भेज दिया गया और उनके बेटे मोहम्मद रेजा शाह गद्दी पर बैठे।

मोहम्मद रेजा ने भी देश को आधुनिक बनाया, लेकिन 1953 में एक तख्तापलट में अमेरिका और ब्रिटेन ने उनका साथ दिया। मोहम्मद रेजा का शासन भी सख्त था। 1979 में इस्लामिक रेवोल्यूशन हुआ, जिसमें अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में लोग सड़कों पर उतरे। शाह को देश छोड़ना पड़ा और राजशाही खत्म हो गई। तब से ईरान इस्लामिक रिपब्लिक है, जहां सुप्रीम लीडर का राज चलता है। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी उन्हीं मोहम्मद रेजा शाह के सबसे बड़े बेटे हैं। वह खुद को 'रेजा शाह द्वितीय' कहते हैं। उनका कहना है कि ईरान का भविष्य ईरानी लोग तय करेंगे। उनकी शादी यासमीन एतेमाद-अमिनी से हुई और उनकी कुल तीन बेटियां हैं।

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अयातुल्ला खुमैनी।

रेजा पहलवी के समर्थन में ईरानी?

ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय बुरी हालत में है। रियाल की कीमत गिर रही है, महंगाई बढ़ रही है और लोग परेशान हैं। 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए। रेजा पहलवी ने 6 जनवरी को पहली बार प्रदर्शन की अपील करते हुए लोगों से कहा कि 8 जनवरी को शाम 8 बजे नारे लगाएं। पहलवी के आवाह्न के बाद प्रदर्शन तेज हो गए, और अब लोग 'डेथ टू द डिक्टेटर' और 'पहलवी विल रिटर्न' के नारे लगा रहे हैं। इस समय ईरान के लोग मौजूदा सत्ता के खिलाफ हैं और पुरानी राजशाही को याद कर रहे हैं। ऐसे में रेजा पहलवी खुद को विपक्ष का चेहरा बनाना चाहते हैं, और वे ट्रंप और वेंस जैसे नेताओं से समर्थन मांग रहे हैं। वहीं, कुर्द पार्टियां भी स्ट्राइक का कॉल दे रही हैं।

क्या ईरान में होगी राजशाही की वापसी?

आज की तारीख में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुछ लोगों को राजशाही की वापसी की उम्मीद भी नजर आने लगी है। ईरान में तमाम प्रदर्शनकारी 'लॉन्ग लिव द शाह' के नारे लगा रहे हैं। रेजा पहलवी की लोकप्रियता बढ़ रही है। रेजा का कहना है कि ईरान में सेकुलर डेमोक्रेसी होनी चाहिए, राजशाही हो या रिपब्लिक, यह जनता तय करेगी। माना जा रहा है कि अगर ईरान से मौजूदा सरकार की विदाई होती है तो ट्रांजिशन में उनका रोल हो सकता है। हालांकि कई चुनौतियां भी हैं। कई ईरानी राजशाही को तानाशाही से जोड़ते हैं। रेजा पहलवी का सपोर्ट बाहर ज्यादा है, और देश में कम है। ईरान की मौजूदा सरकार अभी भी मजबूत है। हां, अगर प्रदर्शन जारी रहे और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला, तो कुछ बदलाव हो सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजर ईरान पर है।

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