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सबरीमाला में किस भगवान की होती है पूजा, यह एक तांत्रिक मंदिर है? मुख्य पुजारी को क्यों कहते हैं तंत्री, जानें सबकुछ

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jan 09, 2026 07:19 pm IST,  Updated : Jan 09, 2026 07:20 pm IST

केरल का सबरीमाला मंदिर एक बार फिर से चर्चा में है। जानते हैं इस मंदिर में किस भगवान की पूजा होती है और इस मंदिर के मुख्य पुजारी को तंत्री क्यों कहते हैं, क्या यह एक तांत्रिक मंदिर है? जानें सबकुछ...

सबरीमाला मंदिर- India TV Hindi
सबरीमाला मंदिर Image Source : WIKIPEDIA

सबरीमाला मंदिर एक बार फिर से चर्चा में है। इसकी वजह ये है कि इस मंदिर के मूर्तियों पर चढ़ाई गई सोने के चढ़ावों के वजन में भारी कमी पाई गई थी, जिससे कथित तौर पर सोने की चोरी का आरोप लगा था। केरल हाई कोर्ट के आदेश पर विशेष जांच दल यानी एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है, जिसमें जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एसआईटी ने बताया कि आरोपियों ने सिर्फ सोना  ही नहीं चुराया, बल्कि मंदिर के गर्भगृह से अन्य सोने की कलाकृतियों को भी लूट लिया। मामले में मंदिर के मुख्य पुजारी कंदरारु राजीवरु सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और मंदिर प्रशासन के कुछ लोग अब भी जांच के घेरे में हैं।

इस मंदिर में किस भगवान की होती है पूजा

यह मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर स्थित है। यह मंदिर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा है, अगर आप जानना चाहते हैं कि इस मंदिर में किस भगवान की पूजा होती है, तो जान लीजिए इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है, जिन्हें भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का स्त्री अवतार) का पुत्र माना जाता है। भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध है। 

भगवान अयप्पा
Image Source : WIKIPEDIAभगवान अयप्पा

भगवान अयप्पा की पूजा के क्या हैं नियम

प्रथा है कि इस मंदिर में आने से पहले भक्तों को 41 दिनों की तपस्या करनी होती है और सभी सांसारिक सुखों का त्याग करना चाहिए। मंदिर में भगवान के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु अपने सिर पर पोटली रखकर पहुंचते हैं। वह पोटली नैवेद्य यानी भगवान अयप्पा को चढ़ाई जानी वाली चीज़ें, जिन्हें प्रसाद के तौर पर पुजारी घर ले जाने को देते हैं, उनसे भरी होती हैं।

इस मंदिर में विराजमान भगवान अय्यप्पा को लोग ब्रह्मचारी देवता मानते हैं, इस वजह से पहले प्रथा थी कि मासिक धर्म की उम्र यानी 10 से 50 वर्ष के बीच की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से मना किया जाता था लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश वर्जित होना असंवैधानिक है। इस फैसले के बाद विरोध प्रदर्शन हुए और सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश और पूजा करने की इजाजत दे दी।

सबरीमाला मंदिर का इतिहास
Image Source : WIKIPEDIAसबरीमाला मंदिर का इतिहास

मुख्य पुजारी को क्यों कहते हैं तंत्री

  • सबरीमाला मंदिर के लिए तंत्री एक महत्वपूर्ण पद है। तंत्री मंदिर के मुख्य पुजारी होते हैं और वे मंदिर की धार्मिक प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण अनुष्ठानों के लिए जिम्मेदार होते हैं। सबरीमाला के तंत्री पारंपरिक रूप से थाझमोन मैडम परिवार से आते हैं, जो केरल के चेंगाण्णूर के पास मुंडंकवु में स्थित है। मंदिर के खुलने और महत्वपूर्ण समारोहों के दौरान तंत्री की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और वे सभी तांत्रिक पूजाओं का संचालन करते हैं। 

     

  • तंत्री वह व्यक्ति होता है जिसे इन प्राचीन तांत्रिक विधियों और मंत्रों का गहरा ज्ञान होता है और जो मंदिर की 'प्राण-प्रतिष्ठा' (मूर्ति में जीवन का संचार) करने का अधिकार रखता है। मान्यता है कि तंत्री ने ही मूर्ति की स्थापना की होती है, इसलिए उन्हें देवता के 'गुरु' या 'पितामह' के समान माना जाता है। मंदिर के भीतर किसी भी महत्वपूर्ण अनुष्ठान या शुद्धि प्रक्रिया के लिए उनकी उपस्थिति और अनुमति अनिवार्य होती है। 
     
  • सबरीमाला में तंत्री का पद वंशानुगत होता है। यह अधिकार केरल के चेंगन्नूर स्थित थाझामोन मदोम ब्राह्मण परिवार के पास है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने ही इस परिवार को सबरीमाला में तांत्रिक पूजा करने का अधिकार सौंपा था। मंदिर की धार्मिक मर्यादाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं के मामले में तंत्री का निर्णय अंतिम होता है। वे मंदिर के दैनिक पुजारी से भिन्न होते हैं, क्योंकि मेलशांति का चयन हर साल होता है, जबकि तंत्री का पद एक ही परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। 

क्या यह एक तांत्रिक मंदिर है

सबरीमाला एक तांत्रिक मंदिर है, जहां अनुष्ठान वेदों के बजाय मुख्य रूप से आगम और तंत्र शास्त्रों पर आधारित होते हैं। सबरीमाला तंत्री चेंगन्नूर थजामोन मदोम से संबंधित हैं। ऐसा माना जाता है कि पंडालम शाही परिवार ने भगवान अयप्पा के लिए तांत्रिक पूजा करने के लिए आंध्र प्रदेश से थज़ामोन ब्राह्मणों को आमंत्रित किया था। सबरीमाला में धर्मशास्ता की पंचधातु (पांच धातुओं की मिश्रधातु) प्रतिमा को 4 जून, 1951 को थाझामोन मठ के कंदारारु शंकरारु द्वारा निर्मित और स्थापित किया गया था। "कंदारारु" थाझामोन तांत्रिकों के नामों से पहले प्रयुक्त एक पारंपरिक उपाधि है।

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