संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में पढ़ने के इच्छुक यूएई छात्रों के लिए सरकारी फंडिंग को सीमित करने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है, जो इस्लामी मुस्लिम ब्रदरहुड पर यूके के रुख को लेकर बढ़ते तनाव को दर्शाता है। यह कदम दोनों देशों के बीच गहरे तनाव का संकेत देता है और यूके-यूएई शैक्षिक संबंधों के भविष्य के बारे में सवाल खड़े करता है। इसका सबसे ज्यादा असर ब्रिटेन में पढ़ने वाले यूएई छात्रों पर पड़ने वाला है।
UAE ने UK के विश्वविद्यालयों को स्कॉलरशिप लिस्ट से किया बाहर
'द फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में राज्य छात्रवृत्ति के लिए पात्र अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की एक संशोधित सूची प्रकाशित की। संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और इज़राइल के संस्थान इस लिस्ट में शामिल है, लेकिन ब्रिटेन के विश्वविद्यालय इसमें शामिल नहीं है।
अधिकारियों ने यूके के प्रतिनिधियों से कहा कि यह बहिष्कार जानबूझकर किया गया, न कि कोई चूक। सूत्रों ने बताया कि अबू धाबी की चिंता अमीराती छात्रों को यूके परिसरों में संभावित इस्लामी कट्टरता के संपर्क में आने से रोकना है। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे कट्टरपंथी बनें।
छात्रों पर पड़ेगा सीधा असर
अधिकारियों ने द टाइम्स यूके को यह भी बताया कि यूके में स्टडी करने के इच्छुक छात्रों को अब सरकारी मदद नहीं मिल पाएगी। धनी परिवार अभी भी अपने बच्चों को ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में भेज सकते हैं यदि वे पढ़ाई का खर्चा उठाने में सक्षम हैं, जबकि अन्य देशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सरकारी फंडिंग और स्कॉलरशिप जारी रहेगी। जो छात्र पहले ही ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में एडमिशन ले चुके थे, उन्हें सहायता मिलती रहेगी, लेकिन नए नियमों का मतलब है कि UK में अब पढ़ाई शुरू करने वाले यूएई छात्रों को कोई सरकारी फंड नहीं मिलेगा।
UK जाने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट
इस फैसले का असर साफ दिखाई दे रहा है। सितंबर 2025 को समाप्त हुए वर्ष में, UK के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए केवल 213 यूएई छात्रों को वीज़ा दिया गया, जो पिछले साल से 27 प्रतिशत और 2022 से 55 प्रतिशत की गिरावट है।
स्कॉलरशिप प्रतिबंधों के अलावा, UAE ने यह भी कहा है कि मान्यता वाली लिस्ट में शामिल नहीं होने वाले विश्वविद्यालयों, जिनमें अधिकांश ब्रिटिश संस्थान शामिल हैं, से प्राप्त योग्यताएं देश में मान्यता प्राप्त नहीं होंगी। इससे UAE में रोजगार या आगे की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए यूके की डिग्रियों की वैल्यू कम हो जाती है।
बता दें कि UAE का यह कदम इस्लामी आंदोलनों, विशेषकर मुस्लिम ब्रदरहुड के बारे में उसकी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं से जुड़ा है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव देखने को मिल रहा है।
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड?
मुस्लिम ब्रदरहुड एक मूवमेंट या विचारधारा है। यह अरब जगत का सबसे पुराना इस्लामिक राजनीतिक ग्रुप है। 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना नामक एक इस्लामी विद्वान और शिक्षक ने इसकी स्थापना की थी। उनका मकसद एक सार्वभौमिक इस्लामी शासन प्रणाली का निर्माण करना था, जिसके तहत ऐसे समाज का निर्माण हो सके जहां इस्लामी कानूनों और और नैतिकता को बढ़ावा मिल सके।
यूएई मुस्लिम ब्रदरहुड को कट्टरपंथी संगठन मानता है और इसपर प्रतिबंध लगा चुका है। वहीं, ब्रिटेन ने अब तक मुस्लिम ब्रदरहुड पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया है। इसलिए UAE अधिकारियों का मानना है कि ब्रिटेन में स्थित विश्वविद्यालय में इससे जुड़ी विचारधारा को जगह मिल सकती है।