जयपुर में आज 78वें सेना दिवस पर पहली बार आयोजित परेड में भारतीय सेना ने अपने शौर्य, जुनून, साहस और अजेय ताकत का प्रदर्शन किया। आर्मी-डे परेड के साथ एक नया अध्याय भी जुड़ा है, क्योंकि इस परेड में पहली बार भारतीय सेना की ‘भैरव बटालियन’ भी देश और दुनिया के सामने दिखाई दी। भारतीय सेना ने अपनी युद्ध क्षमता को और आधुनिक व प्रभावी बनाने की दिशा में 'भैरव बटालियन' के नाम से एक नई जांबाज और हाई-टेक यूनिट को शामिल किया है।
जानें भैरव बटालियन के बारे में
इंडियन आर्मी ने युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए एक नई बटालियन तैयार की है, जिसका नाम रखा है 'भैरव'। भैरव का मतलब होता है जिसको ना डर हो ना पश्चाताप हो। इसी बात को ध्यान में रखकर भैरव बटालियन बनी है। भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है। इसके प्रतीक पर लिखा है कि अदृश्य और अदम्य। यह बटालियन चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं के साथ-साथ देश के भीतर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। 250 सैनिकों की इस टुकड़ी में इंफेंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल और अन्य सपोर्ट यूनिट्स के जवान शामिल हैं।
दुश्मन के लिए काल, 'कोबरा' है प्रतीक चिन्ह
यह बटालियन भारतीय सेना की उन चुनिंदा यूनिट्स में शामिल है, जो 24×7 किसी भी मुश्किल से मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए हमेशा तैयार रहती है। इस बटालियन को तेज कार्रवाई, साहसिक अभियानों और अदम्य जज्बे के लिए जाना जाता है। भैरव बटालियन का प्रतीक चिह्न 'कोबरा' है। जैसे कोबरा का वार खाली नहीं जाता, वैसे ही यह यूनिट दुश्मन के लिए काल साबित होगी।

क्यों खास है सेना की नई टुकड़ी?
- भैरव बटालियन एक नई श्रेणी अत्याधुनिक तकनीक से लैस भारतीय सेना की नई टुकड़ी है। करीब 250 सैनिकों से बनी भैरव बटालियन को इस तरह तैयार किया गया है कि वह 24×7 दुश्मन पर त्वरित और निर्णायक हमला करने के लिए हमेशा तैयार रहे।
- भैरव के योद्धा हर तरह के हथियारों से लैस हैं। इस बटालियन के माहिर कमांडो के पास क्लोज कॉम्बैट के लिए AK-203 जैसे हथियार हैं। 1500 मीटर तक मार करने वाले स्नाइपर हैं और लंबी दूरी तक दुश्मन के बड़े हथियार को नष्ट करने वाले रॉकेट लॉन्चर भी हैं।
- यह बटालियन छोटे ऑपरेशन से लेकर उच्च जोखिम वाले मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे स्पेशल फोर्स और इंफ्रेंटी के बीच का गैप भरने के लिए तैयार किया गया है।
- इसे लाइट कमांडो फोर्स भी कहा जा सकता है जो कि बेहद फुर्तीली और घातक है। इसे खासकर चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर तेज और जोरदार अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।
- इस बटालियन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर कमांडो को ड्रोन ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी गई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से किए गए ड्रोन हमलों को देखते हुए सर्विलांस ड्रोन, अटैक ड्रोन, काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन।हर स्तर पर भैरव कमांडो को तैयार किया गया है।
- भैरव बटालियन को राजस्थान, जम्मू, लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जा रहा है।
- भैरव बटालियन के प्रतीक चिह्न में एक कोबरा की तस्वीर है। साथ ही लिखा है- अदृश्य, अदम्य। कोबरा इसलिए दिखाया गया कोबरा का वार खाली नहीं जाता। अगर वह दुश्मन को काट ले तो उसकी मौत निश्चित है और इसी प्रकार 'भैरव' दुश्मन का काल है।
- इस साल 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में भैरव बटालियन हिस्सा लेगी। पहली बार इस बटालियन के जवान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सलामी देते नजर आएंगे।
क्यों पड़ी भैरव बटालियन की जरूरत?
बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंडियन आर्मी को एक ऐसी यूनिट की जरूरत महसूस हुई जो, दुश्मन की सीमा में गहराई तक घुसकर कार्रवाई कर सके। आतंकी लॉन्च पैड और फॉरवर्ड पोस्ट को नष्ट कर सके, इसी जरूरत ने भैरव बटालियन को जन्म दिया। जैसा कि आप जानते हैं स्पेशल फोर्सज स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन के लिए होती है और साथ में जो घातक होती है वह टैक्टिकल ऑपरेशन में काम करती है। इन दोनों के बीच का जो गैप है उसके लिए भैरव का निर्माण किया गया है। यह यूनिट इन्फेंट्री बटालियन के घातक कमांडो और स्पेशल फोर्सेज (पैरा-SF) के बीच की रणनीतिक कड़ी के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य आर्मी को और अधिक लीन, फुर्तीली और घातक बनाना है।
आज जयपुर से देशभर के लिए आर्मी डे की एक खास और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई। आज की परेड में पूरी दुनिया की नजरें 'भैरव बटालियन' पर टिकी थीं, जो पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने आई।
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