Wednesday, March 04, 2026
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महाराष्ट्र निकाय में खिला 'कमल': हिंदुत्व vs मराठी मानुष की जंग में कैसे जीती महायुति, क्यों हारे ठाकरे बंधु? जानें

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal Published : Jan 16, 2026 11:24 pm IST, Updated : Jan 17, 2026 04:37 pm IST

महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिका में भाजपा नीत गठबंधन को जीत मिली है और ठाकरे बंधुओं की हार हुई है। सबसे बड़ी हार तो बीएमसी की हार है। महायुति की जीत और ठाकरे बंधुओं की हार की क्या रही वजह? जानें इस एक्सप्लेनर में....

महाराष्ट्र में महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (PTI) महाराष्ट्र में महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार

Explainer: महाराष्ट्र के 29 नगर महापालिका के लिए हुए चुनाव के रिजल्ट घोषित हो गए हैं जिसमें बीजेपी गठबंधन महायुति ने 29 नगर निगमों में से 25 पर अपना परचम लहराया है। इसमें भाजपा नीत गठबंधन को सबसे बड़ी जीत देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मिली है। दशकों तक ठाकरे परिवार के दबदबे वाले इस अभेद्य किले बीएमसी में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है और अब मुंबई में बीजेपी का मेयर बनना तय हो गया है।

जनता ने फिर जताया भाजपा पर भरोसा

बीएमसी के साथ ही नागपुर से पुणे, नासिक से सोलापुर तक बीजेपी गठबंधन ने जीत दर्ज कर नया मुकाम हासिल किया है और इस बार के इस निकाय चुनाव में मिला परिणाम साफ संकेत दे रहा है कि देश की राजनीति में भाजपा का जनाधार और मजबूत हुआ है। इससे पहले केरल में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में भी जीत दर्ज कर बीजेपी ने नया इतिहास रच दिया था। इस वजह से अब भाजपा उत्साह से भरी हुई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक जनता का भरोसा भाजपा के साथ है।

देवेंद्र फडणवीस
Image Source : PTIदेवेंद्र फडणवीस

भाजपा गठबंधन की जीत के खास कारण

भाजपा चुनावी नुकसान की परवाह नहीं करती इसी वजह से महाराष्ट्र में पार्टी ने इसी जोखिम भरी राजनीति को लेकर बड़ा दांव खेला। बता दें कि इस बार के हुए लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस-शरद पवार-उद्धव ठाकरे गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन महायुति को बड़ा झटका दिया था। लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में नुकसान की भरपाई की और चुनौती स्वीकार करते हुए धमाकेदार वापसी की, और अब नगर निकाय चुनावों में जीत दर्ज कर विपक्ष को निर्णायक जवाब दिया।

फडणवीस और शिंदे
Image Source : PTIफडणवीस और शिंदे

लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली और हाइपर लोकल पर ध्यान दिया और 29 बिंदुओं वाला घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को शामिल किया। इसके साथ ही हिंदुत्व, विकास और मजबूत नेतृत्व के साथ भाजपा ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भी ध्यान दिया और अब नया अध्याय लिख दिया है। लोगों ने फडणवीस और शिंदे की जोड़ी पर फिर से भरोसा जताया है।

ठाकरे बंधुओं की हार के पीछे की खास वजह

अंकगणित के बजाय खून के रिश्ते को चुनकर उद्धव ठाकरे ने भले ही परिवार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली हो, लेकिन उन्होंने मुंबई का ज्यादातर वोटबैंक खो दिया। ठाकरे परिवार ने मुंबई में मराठी अस्मिता को मुख्य मुद्दा बनाया था, लेकिन उनकी यह रणनीति इस बार कारगर नहीं हुई। उद्धव और राज ठाकरे दोनों भाई 20 साल बाद साथ आए और दोनों ने इस चुनाव में अपनी पूरी रणनीति मराठी मतदाताओं पर केंद्रित कर दी, जिसकी वजह से मुंबई में रहने वाले दूसरे समुदायों ने उनसे दूरी बना ली। 

राज ठाकरे
Image Source : PTIराज ठाकरे

उनकी रणनीति इस वजह से फेल हो गई क्योंकि मुंबई एक ऐसी जगह है, जहां अलग-अलग भाषा और जाति समुदाय के लोग रहते हैं। यहां  मराठी वोट 35% है, जो कि काफी अहम हैं, लेकिन बाकी बचे 65% लोग राज ठाकरे की उकसावे वाली बयानबाजी से मायूस हो गए और खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे थे।

राज ठाकरे का मस्जिदों में लाउडस्पीकर के खिलाफ आक्रामक रुख  मुस्लिम मतदाताओं के लिए आज भी दर्द की वजह बना हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनावों में उद्धव का समर्थन करने वाले कई मुस्लिम वोटर्स उनका राज ठाकरे से हाथ मिलाना बर्दाश्त नहीं कर सके। राज ठाकरे से दूर रहकर कांग्रेस के साथ महाविकास अघाड़ी गठबंधन में उद्धव ठाकरे की छवि उदार थी और महाविकास अघाड़ी में अलग-अलग समुदाय के लोग भी उनको पसंद करते थे। लेकिन राज ठाकरे से गले मिलते ही उनकी ये उदारवादी छवि लोगों के बीच खत्म हो गई।

महाराष्ट्र की जनता ने क्यों महायुति को चुना, ठाकरे बंधुओं को नकारा

महाराष्ट्र में उत्तर और दक्षिण भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी और उनके साथ राज ठाकरे का व्यवहार किसी से छिपा नहीं है। उद्धव ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन क्या किया, इन समुदायों के दिल में राज ठाकरे के साथ पुराने मतभेदों की यादें ताजा हो गईं। राज की मराठी बनाम अन्य की सोच ने लोगों के मन में एक बार फिर से डर का माहौल बना दिया, जिसकी वजह से इन लोगों को बीजेपी- शिंदे शिवसेना, महायुति गठबंधन का ही विकल्प ज्यादा अच्छा लगा।

उद्धव ठाकरे
Image Source : PTIउद्धव ठाकरे

निकाय चुनाव में ठाकरे बंधुओं ने "मराठी गौरव" के नारे पर चुनाव प्रचार किया, जबकि महायुति गठबंधन ने बुनियादी ढांचे और विकास के नाम पर जनता से वोट मांगे। ऐसे में महाराष्ट्र के समझदार वोटर्स को लगा कि पहचान की लड़ाई से गड्ढों, पानी, पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे और स्थानीय परिवहन जैसी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है और इसी खास वजह से लोगों ने भाजपा नीत महायुति गठबंधन पर भरोसा जताया और जीत दिलाई।

 

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