Friday, January 16, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. Explainers
  3. Explainer: महाराष्ट्र निकाय में खिला 'कमल', महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार के पीछे क्या है वो खास वजह?

Explainer: महाराष्ट्र निकाय में खिला 'कमल', महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार के पीछे क्या है वो खास वजह?

महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिका में भाजपा नीत गठबंधन को जीत मिली है और ठाकरे बंधुओं की हार हुई है। सबसे बड़ी हार तो बीएमसी की हार है। महायुति की जीत और ठाकरे बंधुओं की हार की क्या रही वजह? जानें इस एक्सप्लेनर में....

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Jan 16, 2026 11:24 pm IST, Updated : Jan 16, 2026 11:24 pm IST
महाराष्ट्र में महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (PTI) महाराष्ट्र में महायुति की जीत, ठाकरे बंधुओं की हार

Explainer: महाराष्ट्र के 29 नगर महापालिका के लिए हुए चुनाव के रिजल्ट घोषित हो गए हैं जिसमें बीजेपी गठबंधन महायुति ने 29 नगर निगमों में से 25 पर अपना परचम लहराया है। इसमें भाजपा नीत गठबंधन को सबसे बड़ी जीत देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मिली है। दशकों तक ठाकरे परिवार के दबदबे वाले इस अभेद्य किले बीएमसी में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है और अब मुंबई में बीजेपी का मेयर बनना तय हो गया है।

जनता ने फिर जताया भाजपा पर भरोसा

बीएमसी के साथ ही नागपुर से पुणे, नासिक से सोलापुर तक बीजेपी गठबंधन ने जीत दर्ज कर नया मुकाम हासिल किया है और इस बार के इस निकाय चुनाव में मिला परिणाम साफ संकेत दे रहा है कि देश की राजनीति में भाजपा का जनाधार और मजबूत हुआ है। इससे पहले केरल में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में भी जीत दर्ज कर बीजेपी ने नया इतिहास रच दिया था। इस वजह से अब भाजपा उत्साह से भरी हुई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक जनता का भरोसा भाजपा के साथ है।

भाजपा गठबंधन की जीत के खास कारण

भाजपा चुनावी नुकसान की परवाह नहीं करती इसी वजह से महाराष्ट्र में पार्टी ने इसी जोखिम भरी राजनीति को लेकर बड़ा दांव खेला। बता दें कि इस बार के हुए लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस-शरद पवार-उद्धव ठाकरे गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन महायुति को बड़ा झटका दिया था। लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में नुकसान की भरपाई की और चुनौती स्वीकार करते हुए धमाकेदार वापसी की, और अब नगर निकाय चुनावों में जीत दर्ज कर विपक्ष को निर्णायक जवाब दिया।

लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली और हाइपर लोकल पर ध्यान दिया और 29 बिंदुओं वाला घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को शामिल किया। इसके साथ ही हिंदुत्व, विकास और मजबूत नेतृत्व के साथ भाजपा ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भी ध्यान दिया और अब नया अध्याय लिख दिया है। लोगों ने फडणवीस और शिंदे की जोड़ी पर फिर से भरोसा जताया है।

ठाकरे बंधुओं की हार के पीछे की खास वजह

अंकगणित के बजाय खून के रिश्ते को चुनकर उद्धव ठाकरे ने भले ही परिवार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली हो, लेकिन उन्होंने मुंबई का ज्यादातर वोटबैंक खो दिया। ठाकरे परिवार ने मुंबई में मराठी अस्मिता को मुख्य मुद्दा बनाया था, लेकिन उनकी यह रणनीति इस बार कारगर नहीं हुई। उद्धव और राज ठाकरे दोनों भाई 20 साल बाद साथ आए और दोनों ने इस चुनाव में अपनी पूरी रणनीति मराठी मतदाताओं पर केंद्रित कर दी, जिसकी वजह से मुंबई में रहने वाले दूसरे समुदायों ने उनसे दूरी बना ली। 

उनकी रणनीति इस वजह से फेल हो गई क्योंकि मुंबई एक ऐसी जगह है, जहां अलग-अलग भाषा और जाति समुदाय के लोग रहते हैं। यहां  मराठी वोट 35% है, जो कि काफी अहम हैं, लेकिन बाकी बचे 65% लोग राज ठाकरे की उकसावे वाली बयानबाजी से मायूस हो गए और खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे थे।

राज ठाकरे का मस्जिदों में लाउडस्पीकर के खिलाफ आक्रामक रुख  मुस्लिम मतदाताओं के लिए आज भी दर्द की वजह बना हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनावों में उद्धव का समर्थन करने वाले कई मुस्लिम वोटर्स उनका राज ठाकरे से हाथ मिलाना बर्दाश्त नहीं कर सके। राज ठाकरे से दूर रहकर कांग्रेस के साथ महाविकास अघाड़ी गठबंधन में उद्धव ठाकरे की छवि उदार थी और महाविकास अघाड़ी में अलग-अलग समुदाय के लोग भी उनको पसंद करते थे। लेकिन राज ठाकरे से गले मिलते ही उनकी ये उदारवादी छवि लोगों के बीच खत्म हो गई।

महाराष्ट्र की जनता ने क्यों महायुति को चुना, ठाकरे बंधुओं को नकारा

महाराष्ट्र में उत्तर और दक्षिण भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी और उनके साथ राज ठाकरे का व्यवहार किसी से छिपा नहीं है। उद्धव ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन क्या किया, इन समुदायों के दिल में राज ठाकरे के साथ पुराने मतभेदों की यादें ताजा हो गईं। राज की मराठी बनाम अन्य की सोच ने लोगों के मन में एक बार फिर से डर का माहौल बना दिया, जिसकी वजह से इन लोगों को बीजेपी- शिंदे शिवसेना, महायुति गठबंधन का ही विकल्प ज्यादा अच्छा लगा।

निकाय चुनाव में ठाकरे बंधुओं ने "मराठी गौरव" के नारे पर चुनाव प्रचार किया, जबकि महायुति गठबंधन ने बुनियादी ढांचे और विकास के नाम पर जनता से वोट मांगे। ऐसे में महाराष्ट्र के समझदार वोटर्स को लगा कि पहचान की लड़ाई से गड्ढों, पानी, पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे और स्थानीय परिवहन जैसी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है और इसी खास वजह से लोगों ने भाजपा नीत महायुति गठबंधन पर भरोसा जताया और जीत दिलाई।

 

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement