Basant Panchami Shlok & Mantra: मां सरस्वती को हिंदू धर्म में ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं जिस किसी पर माता की विशेष कृपा बरसती है उसे जीवन में सफल होने से कोई रोक नहीं सकता। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार मां सरस्वती की कृपा से ही समस्त संसार को वाणी और संगीत की प्राप्ति हुई थी। कहते हैं जिस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था उस दिन माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी इसलिए ही हर साल इस तिथि को बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाने लगा। कहते हैं इस दिन मां सरस्वती की विशेष अराधना करने से जीवन में सुख-समद्धि की प्राप्ति होती है।
यदि आप छात्र हैं या कला-संगीत से जुड़े हैं या अपने करियर में नई ऊंचाइयां छूना चाहते हैं तो इस बसंत पंचमी पर मां सरस्वती के इन शक्तिशाली मंत्रों और श्लोकों का जाप अवश्य करें।

मां सरस्वती श्लोक इन संस्कृत (Maa Saraswati Shlok)
1. सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् ।
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना:
2. ओउम या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ,
या वीणावरदण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।

3. सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
4. नास्ति विद्यासमं चक्षुः नास्ति सत्यसमं तपः।
नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥
सरस्वती माता के मंत्र (Saraswati Mata Ke Mantra)
5. सरस्वती गायत्री मंत्र - ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

6. ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
7. सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी,
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।

8. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
9. नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।

10. सरस्वती ध्यान मंत्र
ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् ।
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ।।

मां सरस्वती वदंना (Saraswati Vandana in Sanskrit)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्॥2॥
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