Iran-US Tensions: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान के नेतृत्व को दशकों में सबसे कमजोर स्थिति में बताया है। सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष बोलते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान की स्थिति अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है, जबकि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती को मजबूत कर रहा है। रूबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बुद्धिमानी भरा है।
'ईरान ने जमा की हैं लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें'
रूबियो ने यह बात ऐसे समय पर कही है जब यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के नजदीक पहुंच गया है। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में 30,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, और अमेरिका ऐसी सैन्य क्षमता बनाए रखना चाहता है जो ईरानी हमलों से पहले ही उन्हें रोक सके। रूबियो ने ईरान की सैन्य ताकत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ने अपनी अर्थव्यवस्था के चरमराने के बावजूद हजारों लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें जमा की हैं, लेकिन कुल मिलाकर उसका शासन अब सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।
ट्रंप ने बार-बार दी है चेतावनी
फिलहाल, हालात को देखते हुए मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देश, जैसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब, ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंका को लेकर सतर्क हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान में विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा के गंभीर परिणाम होंगे।
'समय खत्म हो रहा है'
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि ईरान को जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आना चाहिए और एक निष्पक्ष परमाणु समझौता करना चाहिए, जिसमें कोई परमाणु हथियार ना हो। उन्होंने लिखा, "समय खत्म हो रहा है!" ट्रंप ने पिछले साल जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" ने तेहरान को बड़ा नुकसान पहुंचाया था, और अगला हमला उससे कहीं अधिक विनाशकारी होगा।
तैयार हैं ईरान की सेनाएं
ईरान ने इन धमकियों का जवाब देते हुए सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने कहा कि वह जवाबी कार्रवाई करेगा, हालांकि बातचीत के लिए भी दरवाजा खुला रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी सशस्त्र सेनाएं तैयार हैं और किसी भी आक्रामकता का तुरंत और शक्तिशाली जवाब देंगी।
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