अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर हमले शुरू किए थे। इस हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले करना शुरू कर दिया। आज 13वें दिन भी पश्चिम एशिया में हालात खराब बने हुए हैं और पूरी दुनिया इसका अंजाम भुगत रही है। ईरान को घुटनों पर लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरबों रुपये फूक रहे हैं। पेंटागन के अधिकारियों ने सांसदों को बताया है कि ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से अमेरिका 11.3 बिलियन डॉलर यानी 1.04 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा अनुमानित खर्च कर चुका है। लेकिन, ये खर्च सिर्फ शुरुआती 6 दिनों का है। इतना ही नहीं, इसमें मिलिट्री हार्डवेयर और लोगों के जमावड़े से जुड़े कई खर्च शामिल नहीं हैं।
इससे भी काफी ज्यादा हो सकता है 6 दिनों का कुल खर्च
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़ा अभी अधूरा है और जैसे-जैसे मोबिलाइजेशन, हथियारों की भरपाई और लंबे ऑपरेशन का खर्च साफ होगा, जिससे अमेरिका के खर्च तेजी से बढ़ने की संभावना है। कैपिटल हिल में सीनेटरों को बंद कमरे में अनुमानित खर्च को लेकर ब्रीफिंग दी गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में 11.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हो गया था। ये आंकड़ा 28 फरवरी को अमेरिका के हवाई हमलों के साथ अभियान शुरू होने के बाद लड़ाकू ऑपरेशन के शुरुआती दौर के दौरान हुए खर्च को दिखाता है।
2000 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत
28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष में सिर्फ बड़ी संख्या में लोगों की ही जानें नहीं जा रहीं बल्कि मोटा पैसा भी खर्च हो रहा है। इस युद्ध में अभी तक लगभग 2000 लोग मारे जा चुके हैं। मारे जाने वाले लोगों में ज्यादातर ईरानी हैं। ईरान के अलावा, लेबनान में भी कई लोगों की जानें जा चुकी हैं, क्योंकि ये लड़ाई लेबनान तक पहुंच गई और इजरायल के हमलों में वहां बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने अपने नियंत्रण में आने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जो वैश्विक तेल और गैस के ट्रांसपोर्टेशन का एक बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है।