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Canara Bank ने लोन पर बढ़ाई ब्याज दर, क्या अब हर महीने चुकानी पड़ सकती है ज्यादा EMI?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 13, 2026 06:56 am IST,  Updated : Mar 13, 2026 02:41 pm IST

केनरा बैंक ने कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बैंक ने दो से तीन साल की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर में 10 बेसिस पॉइंट यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद कई तरह के लोन थोड़ा महंगे हो सकते हैं और ग्राहकों की मासिक किस्त यानी EMI पर असर पड़ सकता है।

केनरा बैंक ने लोन की...- India TV Hindi
केनरा बैंक ने लोन की ब्याज दरें बढ़ाई Image Source : ANI

अगर आपका लोन केनारा बैंक से चल रहा है या आप नया लोन लेने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। बैंक ने अपनी MCLR से जुड़ी कुछ लंबी अवधि की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इस बदलाव के बाद कुछ पुराने लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई बढ़ सकती है। हालांकि, सभी ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ज्यादातर नए रिटेल और MSME लोन अब अलग सिस्टम से जुड़े होते हैं।

केनारा बैंक ने 12 मार्च 2026 से नई MCLR दरें लागू की हैं। बैंक की ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने और एक साल की MCLR दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन बैंक ने दो साल और तीन साल की अवधि वाली MCLR दरों में बढ़ोतरी की है। दो साल की MCLR 8.85% से बढ़ाकर 8.95% कर दी गई है। वहीं, तीन साल की MCLR 8.90% से बढ़ाकर 9.00% कर दी गई है। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिनके लोन अभी भी MCLR सिस्टम से जुड़े हुए हैं।

क्या सभी ग्राहकों की EMI बढ़ेगी?

ध्यान देने वाली बात यह है कि आजकल ज्यादातर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और MSME लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े होते हैं, जिसे RLLR (Repo Linked Lending Rate) कहा जाता है। यह भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों के अनुसार लागू की गई है। इसलिए नए लोन लेने वाले अधिकांश ग्राहकों पर MCLR में हुए इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा बैंक के अनुसार दो साल और तीन साल की MCLR दरें मुख्य रूप से बेंचमार्किंग के लिए होती हैं, न कि रिटेल और MSME लोन की ब्याज दर तय करने के लिए।

क्या करें लोन लेने वाले ग्राहक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका लोन MCLR से जुड़ा हुआ है, तो आपको अपनी EMI और ब्याज दर की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ग्राहक अपने लोन को रेपो लिंक रेट में शिफ्ट करने का ऑप्शन भी देख सकते हैं, जिससे ब्याज दरों में पारदर्शिता और तेजी से बदलाव का फायदा मिल सकता है।

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