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VIDEO: तिरुमला मंदिर में वेडिंग शूट पर बवाल! लड़के की इस हरकत पर भड़के श्रद्धालु

 Reported By: T Raghavan, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jan 29, 2026 12:49 pm IST,  Updated : Jan 29, 2026 12:51 pm IST

तिरुमला मंदिर में वेडिंग शूट का वीडियो देखकर श्रद्धालु भड़क गए हैं। उन्होंने कपल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वीडियो में देखें लोगों ने इस पर आपत्ति क्यों जताई है।

tirumala temple wedding shoot- India TV Hindi
तिरुमाला में वेडिंग शूट पर श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई है। Image Source : REPORTERS INPUT

तिरुपति: आंध्र प्रदेश के तिरुपति में वेडिंग शूट को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। दरअसल, तिरुमला में मंदिर के सामने वेडिंग शूट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। इसको लेकर भक्तों में नाराजगी है। बता दें कि बुधवार को तिरुमला श्रीवारी मंदिर के सामने नए शादीशुदा जोड़े ने फोटो शूट करवाया था। इसका वीडियो देखकर लोग नाराज हो गए और कपल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मंदिर परिसर में वेडिंग शूट से भक्तों में नाराजगी

जान लें कि कपल ने कोलामंडपम से अखिलंदम तक अपनी तस्वीरें खिंचवाईं। उन्होंने फोटो लेते हुए एक-दूसरे के माथे पर किस किया। इस दौरान, उन्होंने अपने कई स्टिल्स खिंचवाए। इससे भक्त असहज हो गए। वे कपल के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं।

तिरुमला में रील बनाने पर लगे रोक

आमतौर पर, तिरुमला में फोटो शूट और रील्स पर रोक है। अब लोग मांग कर रहे हैं कि आगे से सुरक्षाकर्मी, लोगों को ऐसा करने से रोकें। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे। मंदिर में ऐसा वेडिंग शूट और रील बनाना ठीक नहीं है। मंदिर की गरिमा इससे भंग होती है।

तिरुमला मंदिर की खासियत

बता दें कि तिरुमला दुनिया के सबसे समृद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर का है। यह शेषाचलम पहाड़ियों की चोटी पर मौजूद है। इस मंदिर का निर्माण तोंडमान राजा ने कराया था। उनके बाद चोल, पांड्य और विजयनगर के शासकों ने इसका जीर्णोद्धार भी समय-समय पर करवाया। जिन पहाड़ियों पर मंदिर स्थित है, वह समुद्र तल से 980 मीटर ऊपर हैं। यह करीब 10.33 वर्ग मील एरिया में फैली हुई हैं।

कितना पुराना है तिरुमला मंदिर?

यहां पल्लव वंश के शिलालेख 9वीं शताब्दी के मिलते हैं। उसके मुताबिक, पल्लव रानी सामवई ने 966 ईस्वी में तिरुमला मंदिर को तमाम आभूषण और जमीन दान में दी थी। वहीं, चोल और पांड्य राजाओं ने 10वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य मंदिर की संरचना में सुधार और विस्तार करवाए। 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच, सम्राट कृष्णदेवराय ने मंदिर के विकास में योगदान दिया। उन्होंने गर्भगृह के शिखर को सोने से मढ़वा दिया था। साथ ही, कई मंडपों का निर्माण भी करवाया था।

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