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Explainer: आखिर क्या है चीन की 'Panda Diplomacy'? जापान से वापस क्यों आ गए 2 पांडा? जानें पूरी बात

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Jan 28, 2026 02:13 pm IST, Updated : Jan 28, 2026 02:13 pm IST

चीन की ‘पांडा डिप्लोमेसी’ के तहत जापान में रह रहे आखिरी 2 जायंट पांडा शियाओ शियाओ और लेई लेई चीन लौट गए। पिछले 54 साल में यह पहला मौका है जब जापान पांडा-विहीन हुआ है। चीन-जापान रिश्तों के के मौजूदा हालात को देखते हुए नए पांडा भेजे जाने की संभावना कम है।

जापान से चीन वापस आई...- India TV Hindi
Image Source : AP जापान से चीन वापस आई पांडा लेई लेई।

बैंकॉक/टोक्यो: जापान में रह रहे आखिरी दो पांडा, जुड़वां भाई-बहन शियाओ शियाओ (Xiao Xiao) और लेई लेई (Lei Lei), वापस चीन लौट आए हैं। इसके साथ ही पिछले करीब 54 सालों में यह पहला मौका है जब जापान में कोई भी जायंट पांडा नहीं बचा है। ये पांडा टोक्यो के ऊएनो जू (Ueno Zoo) से ट्रक के जरिए नारिता एयरपोर्ट भेजे गए और वहां से चीन पहुंचाए गए। ये जुड़वां पांडा 2021 में ऊएनो जू में ही पैदा हुए थे। उनकी मां शिन शिन और पिता री री भी पहले 'पांडा डिप्लोमेसी' के तहत चीन से उधार पर लिए गए थे, लेकिन वे 2024 में ही वापस अपने देश लौट गए थे। इनकी बड़ी बहन शियांग शियांग भी 2023 में चीन लौट गई थी।

1972 से जापान में मौजूद थे जायंट पांडा

बता दें कि जापान में 1972 से जायंट पांडा लगातार रह रहे थे, जब चीन ने कांग कांग और लान लान नाम के पहले जोड़े को राजनयिक संबंध सामान्य होने के उपलक्ष्य में भेजा था। तब से पांडा जापान में बहुत लोकप्रिय हो गए थे और लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। पहले तय था कि फरवरी 2026 तक वे जापान में रहेंगे, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद जनवरी के अंत में वापसी तय हुई। यह वापसी ऐसे वक्त में हुई है जब जापान और चीन के बीच राजनयिक संबंध कई सालों में सबसे खराब स्थिति में हैं। नई जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने ताइवान पर चीन के हमले की स्थिति में जापान की भूमिका पर बयान दिए, जिससे बीजिंग नाराज है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

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Image Source : APदोनों पांडा को प्लेन के जरिए वापस चीन लाया गया।

नए पांडा जापान भेजे जाने की उम्मीद कम

मौजूदा हालात को देखते हुए चीन द्वारा नए पांडा जापान भेजे जाने की संभावना बहुत कम है। जापान सरकार नए जोड़े के लिए कोशिश कर रही है, लेकिन फिलहाल उसे सफलता नहीं मिली है। एक सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने कहा कि सरकार को नए पांडा के लिए चीन से बात नहीं करनी चाहिए, जबकि 26 फीसदी चाहते हैं कि कोशिश जारी रहे। जापान में पांडा के जाने से ऊएनो जू और आसपास के दुकानदारों को भी नुकसान का डर है, क्योंकि पांडा से जुड़ी चीजें जैसे कि खिलौने, कपड़े, खाने की चीजें वगैरह की बिक्री काफी होती थी। कई लोग कहते हैं कि पांडा ऊएनो के 'स्टार' हैं और उम्मीद है कि वे जल्द वापस आएंगे।

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Image Source : APलेई लेई के साथ उसका भाई शियाओ शियाओ भी वापस आया है।

जापान में काफी लोकप्रिय थे ये दोनों पांडा

जापान में इन दोनों पांडा के लिए बहुत प्यार था। उनके जाने से पहले हजारों लोग ऊएनो जू पहुंचे। 25 जनवरी को इन दोनों को जापान में आखिरी बार देखने के लिए ऑनलाइन लॉटरी से सिर्फ 4400 लोगों को मौका मिला, लेकिन कई और लोग भी जू के बाहर इकट्ठा हुए। कुछ लोग पांडा टोपी पहनकर, झंडे लहराकर और फोन से वीडियो बनाकर भावुक होकर इन दोनों को अलविदा कहा। जू के डायरेक्टर युताका फुकुडा ने इस मौके पर कहा, 'शियाओ शियाओ और लेई लेई इतने प्यारे थे कि सबके दिल में जगह बना ली थी, इसलिए मेरे मन में मिली-जुली भावनाएं हैं।' चीन के विदेश गुओ जियाकुन ने जापान के लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा, 'ये पांडा अब दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत में चीन कंजर्वेशन एंड रिसर्च सेंटर फॉर द जायंट पांडा पहुंच चुके हैं। यहां वे पहले क्वारंटाइन में रहेंगे।'

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Image Source : APजापान में ये दोनों पांडा काफी लोकप्रिय थे।

आखिर क्या है चीन का 'पांडा डिप्लोमेसी'?

चीन की पांडा डिप्लोमेसी एक खास कूटनीतिक तरीका है जिसके तहत चीन अपने राष्ट्रीय जानवर पांडा को दोस्ती के प्रतीक के रूप में दूसरे देशों को उधार पर देता है। ये पांडा दोस्ती, अच्छे रिश्तों और सद्भावना का प्रतीक होते हैं। पांडा बहुत प्यारा और दुर्लभ जानवर है, इसलिए लोग उसे काफी पसंद करते हैं। चीन शुरू में इन्हें दूसरे देशों को गिफ्ट में दे देता था, लेकिन अब अपनी नई पॉलिसी की वजह से ऐसा नहीं करता। पांडा को तय समय के लिए दूसरे देश भेजा जाता है और उनकी देखभाल का खर्च भी मेजबान देश उठाता है। एक पांडा के लिए चीन मेजबान देश से करोड़ों रुपये किराए के तौर पर लेता है। अगर पांडा वहां बच्चे पैदा करते हैं, तो वे भी 'चीन' के ही माने जाते हैं।

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