Sheikh Hasina Reaction On Bangladesh Election: बांग्लादेश में चुनाव से पहले बवाल बढ़ता नजर आ रहा है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। इसी क्रम में अब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में होने वाले चुनावों को लेकर अंतरिम सरकार को निशाने पर लिया। हसीना ने यूनुस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है देश में लाखों लोगों के मताधिकारों को छीन लिया गया है।
बांग्लादेश में रहेगी अस्थिरता
शेख हसीना ने पिछले हफ्ते एसोसिएटेड प्रेस (AP) को भेजे एक ईमेल में चेतावनी देते हुए कहा था कि बिना समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के बांग्लादेश लंबे समय तक अस्थिरता का शिकार रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जानबूझकर उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर करके लाखों समर्थकों के मताधिकार को छीन लिया है।
हसीना ने अंतरिम सरकार पर उठाए सवाल
हसीना ने लिखा, "जब भी आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो इससे असंतोष गहराता है, संस्थानों की वैधता खत्म होती है और भविष्य में अस्थिरता की स्थितियां पैदा होती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "बहिष्कार से बनी सरकार एक विभाजित राष्ट्र को एकजुट नहीं कर सकती।"
बांग्लादेश में 12 फरवरी होगा चुनाव
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव में 127 मिलियन से अधिक मतदाता वोट डालने के योग्य हैं। यह चुनाव दशकों में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 2024 के बड़े पैमाने पर विद्रोह के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसमें हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। यूनुस की अंतरिम सरकार इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही है, जिसमें मतदाता व्यापक राजनीतिक सुधारों पर संवैधानिक जनमत संग्रह पर भी मत रखेंगे।
यूनुस ने संभाली बांग्लादेश की कमान
यूनुस अगस्त 2024 में बांग्लादेश लौटे थे और हसीना के भारत भागने के 3 दिन बाद सत्ता संभाली थी। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का वादा किया है, लेकिन आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद क्या यह प्रक्रिया वास्तव में समावेशी और लोकतांत्रिक होगी। सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

यूनुस के कार्यालय ने क्या कहा?
यूनुस के कार्यालय ने AP को दिए बयान में कहा कि सुरक्षा बल व्यवस्थित और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करेंगे, किसी को भी हिंसा या जबरदस्ती से परिणाम प्रभावित नहीं करने दिया जाएगा। बयान में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों को निमंत्रण देने की बात कही गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ सहित करीब 500 विदेशी पर्यवेक्षक 12 फरवरी को चुनाव देखेंगे।
चुनौतियों से जूझ रहा है बांग्लादेश
हसीना के हटाए जाने के बाद बांग्लादेश कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने अंतरिम सरकार पर नागरिकों की रक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। अवामी लीग ने अपने सदस्यों की मनमानी गिरफ्तारियों और हिरासत में मौतों का दावा किया है, जिन्हें सरकार ने खारिज कर दिया है। आलोचकों ने इस्लामी समूहों के बढ़ते प्रभाव और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। यूनुस सरकार के तहत प्रेस स्वतंत्रता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां कई पत्रकारों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं और 2 प्रमुख दैनिक अखबारों के दफ्तरों पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया है।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी है मुख्य दावेदार
इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी तारिक रहमान के नेतृत्व में मुख्य दावेदार बनकर उभरी है। रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और 17 साल से अधिक निर्वासन में रहने के बाद दिसंबर में स्वदेश लौटे थे। उन्होंने 170 मिलियन की आबादी वाले इस देश की स्थिरता के लिए काम करने का वादा किया है। BNP के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन उभरा है।
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