भारत की अर्थव्यवस्था का धारा-चित्र अक्सर जटिल लगता है, लेकिन इसके पीछे एक सटीक गणित और फ्लो है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रुपया कहां से आता है और कहां जाता है, इसका पूरा हिसाब पेश किया गया है। यह कैलकुलेशन न केवल यह बताता है कि देश में पैसे की आवक-जावक कैसे होती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निवेश, उपभोग, निर्यात-आयात और सरकारी खर्च के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था कैसे लगातार गतिशील रहती है। आइए समझें इस आंकड़ों के जरिये कि रुपया वास्तव में देश कैसे चलता है।
1 रुपये के कैलकुलेशन में समझ जाएंगे सबकुछ
रुपया कहां से आता है?
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में 1 रुपये के आधार पर सरकार के इनकम और खर्च को समझाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को 1 रुपये का इनकम कई माध्यमों से होता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक रुपये के इनकम में 22 प्रतिशत इनकम टैक्स से, 24 प्रतिशत उधार और अन्य देनदारियों से, 9 प्रतिशत गैर-कर प्राप्तियो से, 1 प्रतिशत गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों से, 4 प्रतिशत कस्टम से, 17 प्रतिशत कॉर्पोरेशन टैक्स से, 18 प्रतिशत जीएसटी और दूसरे टैक्स से और 5 प्रतिशत केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भागीदारी होती है। यानी आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार को 1 रुपये में सबसे ज्यादा इनकम सरकारी उधारी और अन्य वित्तीय देनदारियों से होती है।

रुपया कहां चला जाता है?
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, सरकार को इनकम के तौर आए 1 रुपये में, 20 प्रतिशत हिस्सा ब्याज चुकाने में, 16 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र योजना (रक्षा पर पूंजीगत व्यय और सब्सिडी को छोड़कर) में, 6 प्रतिशत बड़ी सब्सिडी देने में, 8 प्रतिशत डिफेंस के लिए, 22 प्रतिशत राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में, 8 प्रतिशत वित्त आयोग और अन्य हस्तांतरण में, 8 प्रतिशत केंद्र सरकार की योजनाओं में, 4 प्रतिशत पेंशन देने में और अन्य मदों में 8 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना होता है। आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार का सबसे ज्यादा खर्च राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में होता है।

प्रमुख मदों का खर्च रुपये में जानें

इस तरह, सरकार इनकम और खर्च को बैलेंस कर देश चलाती है। इसमें महंगाई और वैश्विक आर्थिक हालात के आधार पर अंतर भी हो सकता है। इसे सरकार अपने तंत्र के जरिये मैनेज करती है।






































