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₹1.5 लाख कमाने वाले की भी हालत खराब! क्या बेंगलुरु में रहना मिडिल क्लास के बस की बात नहीं?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 15, 2026 09:27 pm IST,  Updated : Mar 15, 2026 09:27 pm IST

भारत की आईटी राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु में हर साल हजारों युवा अच्छी नौकरी और बड़े सपनों के साथ पहुंचते हैं। यहां की हाई सैलरी वाली टेक जॉब्स और आधुनिक लाइफस्टाइल कई लोगों को आकर्षित करती है। लेकिन कई बार बड़ी सैलरी का उत्साह शहर के बढ़ते खर्चों के सामने फीका पड़ जाता है।

बेंगलुरु में रहना हुआ...- India TV Hindi
बेंगलुरु में रहना हुआ महंगा Image Source : CANVA

बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है। यहां बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां, हाई सैलरी वाली नौकरियां और आधुनिक लाइफस्टाइल लोगों को आकर्षित करती है। लेकिन शहर में आने वाले कई युवाओं के लिए यह सपना जल्दी ही हकीकत से टकरा जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें बताया गया कि ₹1.5 लाख महीने की सैलरी होने के बावजूद बेंगलुरु में बचत करना आसान नहीं है। इस पोस्ट ने शहर में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने अपने कजिन का एक्सपीरिएंस शेयर किया। उसने बताया कि उसका कजिन कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन के बाद सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी के लिए बेंगलुरु गया था। उसे हर महीने करीब ₹1.5 लाख की सैलरी मिलती थी। परिवार को लगा कि अब उसकी जिंदगी आरामदायक हो जाएगी, लेकिन शहर में रहने के खर्च ने जल्दी ही सच्चाई सामने ला दी।

किराया ही ले जाता है बड़ी कमाई का हिस्सा

पोस्ट के मुताबिक, ऑफिस के पास एक छोटे से अपार्टमेंट का किराया ही करीब ₹36 हजार प्रति महीना था। इसके अलावा खाने-पीने और ग्रोसरी पर हर महीने ₹13 हजार से ₹15 हजार खर्च हो जाते थे। शहर में भारी ट्रैफिक के कारण रोजाना कैब या ऑटो का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिस पर लगभग ₹6 हजार से ₹8 हजार तक खर्च हो जाता था। वहीं कभी-कभार बाहर खाना, कॉफी या वीकेंड पर घूमने जैसे खर्च जोड़ दिए जाएं, तो हर महीने ₹10 हजार से ₹12 हजार और खर्च हो जाते थे।

छोटे-छोटे खर्च भी बढ़ाते हैं बोझ

इन बड़े खर्चों के अलावा कुछ ऐसे खर्च भी होते हैं जिन पर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते। जैसे ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन, मेडिकल खर्च, अचानक आने वाले बिल और घर पैसे भेजना। इन सब खर्चों के बाद महीने के आखिर तक बचत मुश्किल से ₹15 हजार से ₹20 हजार ही रह जाती थी।

लोगों ने दिए खर्च कम करने के सुझाव

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी राय भी दी। कुछ यूजर्स का कहना था कि अगर ऑफिस से थोड़ा दूर और मेट्रो के पास घर लिया जाए, तो किराया काफी कम हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि लोग ऑफिस के बिल्कुल पास रहने की कोशिश करते हैं, जहां मांग ज्यादा होने की वजह से किराया भी बहुत बढ़ जाता है।

बड़े शहरों की सच्चाई

इस चर्चा के बाद कई लोगों ने माना कि बड़े शहरों में बड़ी सैलरी का मतलब हमेशा ज्यादा बचत नहीं होता। महंगे किराये, ट्रांसपोर्ट और लाइफस्टाइल खर्च के कारण अच्छी कमाई के बाद भी बचत सीमित रह जाती है।

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