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पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए बोझ बांटने की तैयारी, रिफाइनरियों को लगेगा झटका

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 15, 2026 06:37 pm IST,  Updated : Mar 15, 2026 06:37 pm IST

पश्चिम एशिया संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।

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रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में नहीं के बराबर दखल Image Source : PTI

पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए रिफाइनरियों पर बोझ डालने की तैयारी में हैं। इसके तहत, ये कंपनियां रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयातित दरों से कम कीमत देंगी। बताते चलें कि मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो चुकी है और भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है। हालांकि, अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपने बोझ को कम करने के लिए इसका एक हिस्सा रिफाइनरियों पर भी डालने की तैयारी में हैं।

रिफाइनरियों पर पड़ेगा बुरा असर

इस कदम से मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड, चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी एकल रिफाइनरी कंपनियों पर बुरा असर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब रिफाइनरी हस्तांतरण शुल्क (RTP) पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं।

क्या होता है RTP

RTP वह आंतरिक कीमत होती है, जिस पर रिफाइनरियां अपने मार्केटिंग खंड को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का मकसद रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयात-समता लागत से कम भुगतान करना है। अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस प्रस्तावित कदम से रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ आरटीपी के जरिए आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इस प्रभाव का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा। 

रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में नहीं के बराबर दखल

सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी एकीकृत कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन्स के बीच इस घाटे की भरपाई कर सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL), चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (CPCL) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) जैसी एकल रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में नहीं के बराबर दखल है और वे अपना अधिकांश उत्पादन इन्हीं 3 तेल मार्केटिंग कंपनियों को बेचती हैं। ऐसे में उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

नायरा एनर्जी और रिलायंस जैसी रिफाइनरी भी होंगी प्रभावित

सूत्रों ने ये भी कहा कि अगर आरटीपी पर रोक या छूट निजी रिफाइनरियों पर भी लागू की जाती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसे रिफाइनरी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। ये दोनों निजी कंपनियां अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा तेल मार्केटिंग कंपनियों को बेचती हैं।

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