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ईरान युद्ध के बीच भी नहीं बढ़े सोने-चांदी के दाम, निवेशकों को चौंका रहा बाजार का नया खेल!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 15, 2026 07:31 pm IST,  Updated : Mar 15, 2026 07:31 pm IST

आम तौर पर जब दुनिया में युद्ध या बड़ा संकट होता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने और चांदी की ओर दौड़ते हैं। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई।

सोने-चांदी की कीमतों...- India TV Hindi
सोने-चांदी की कीमतों ने सबको चौंकाया Image Source : CANVA

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिला दिया है। आमतौर पर ऐसे संकट के समय निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हुए इनकी खरीद बढ़ा देते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार बाजार का ट्रेंड उल्टा दिखाई दे रहा है। युद्ध के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक उछाल नहीं आया, बल्कि हाल के दिनों में इन पर दबाव देखा गया है। इससे निवेशक हैरान हैं और बाजार की चाल को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

चांदी में आई बड़ी गिरावट

कमोडिटी बाजार में हाल के सत्रों में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर संघर्ष शुरू होने के बाद से चांदी के दाम में करीब 14,000 रुपये यानी लगभग 5 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। वहीं सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान कीमती धातुओं में तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार की चाल अलग नजर आ रही है।

रिस्क-ऑफ माहौल का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे समय में कई निवेशक अपने रिस्क को कम करने के लिए कैश जुटाने लगते हैं। इसके लिए वे अपने पोर्टफोलियो में मौजूद सोने-चांदी जैसी संपत्तियों को भी बेच देते हैं। यही वजह है कि कम समय में इन धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।

मजबूत डॉलर बना एक और कारण

सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का भी असर पड़ा है। जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे डॉलर मजबूत होता है। चूंकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने पर अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है और मांग कम हो सकती है।

मुनाफावसूली भी बनी वजह

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हालिया गिरावट के पीछे मुनाफावसूली का भी बड़ा हाथ है। पिछले साल और इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतों में पहले ही काफी तेजी आ चुकी थी। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर कई निवेशकों ने अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए सोना और चांदी बेचना शुरू कर दिया।

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