फ्रांस की आधिकारिक मुद्रा यानी करेंसी यूरो (Euro) है, जिसका प्रतीक € और कोड EUR है। फ्रांस ने 1 जनवरी 1999 से यूरो को अपनाया था। पहले वहां फ्रेंच फ्रैंक चलता था, लेकिन अब यूरो ही इस्तेमाल होता है।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला, जो पिछले बंद स्तर 91.49 के मुकाबले 119 पैसे की बढ़त दर्शाता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबवे अपनी वास्तविक क्षमता से कम परफॉर्म कर रहा है।
सरकार को रेवेन्यू या कमाई के तौर पर कई स्रोतों से पैसे आते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा इनकम सरकारी उधारी और अन्य वित्तीय देनदारियों से होती है। लेकिन जब खर्च की बारी आती है तो सबसे ज्यादा खर्च राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में होता है।
आज से पहले रुपये ने बीते 16 दिसंबर 2025 को 91.14 ऑल टाइम लो का रिकॉर्ड बनाया था। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बिकवाली ने भारतीय रुपये को कमजोर किया है।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 89.89 पर खुला और कारोबार के दौरान 89.95 के निचले और 89.84 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा।
गवर्नर ये स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी।
रुपये का अवमूल्यन लगातार चुनौती खड़ी कर रहा है, जो हाल ही में पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। ओपन सेल, सेमीकंडक्टर चिप्स और मदरबोर्ड का आयात इससे महंगा हो गया है, जिसका असर टीवी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
कई न्यूज वेबसाइट्स की सोशल मीडिया पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी की तस्वीर के साथ उनका एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें रुपया और डॉलर को लेकर उनके बयान को कोट किया गया है।
अब खबर आ रही है कि टीवी और स्मार्टफोन दोनों के दाम में जोरदार इजाफा देखा जा सकता है और इसके पीछे दो खास वजह हैं जिनके बारे में आपको जान लेना चाहिए।
भारत में बुधवार का दिन आर्थिक इतिहास में दर्ज हो गया क्योंकि पहली बार भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के नीचे फिसल गया। मंगलवार के 89.94 से गिरकर रुपया 90.14 पर पहुंच गया। गिरावट मामूली लग सकती है, लेकिन इसका असर गहरा है।
भारतीय रुपया लगातार नए-नए रिकॉर्ड लो बनाता जा रहा है और बुधवार को इसने इतिहास का सबसे कमजोर स्तर छू लिया। डॉलर के मुकाबले 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 90.14 पर पहुंचा रुपया अब हर तरफ चिंता बढ़ा रहा है।
फरवरी 2022 में 99 पैसे की गिरावट इसके करीब का अंतिम रिकॉर्ड था। विश्लेषकों ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी में भारी गिरावट, AI-linked टेक स्टॉक्स के तेजी से टूटने, ग्लोबल ‘रिस्क ऑफ’ मोड, इन सबने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं जिसमें रुपया भी शामिल है को कमजोर किया।
बजट बनाना धन प्रबंधन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यह एक बहुत ही सरल उपाय है और सदियों से इसका इस्तेमाल होता आ रहा है। बजट बनाने के लिए, अपनी आय, जीवनशैली और जरूरतों के आधार पर हर महीने खर्च करने के लिए आदर्श राशि का अनुमान लगाएं।
आरबीआई का घोषित रुख ये है कि वो रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट के किसी स्तर या दायरे को लक्षित नहीं करता बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में केवल तभी हस्तक्षेप करता है जब अत्यधिक अस्थिरता हो।
अगर मुद्रा विनिमय के प्रभाव को अलग रखें तो मार्च से जून 2025 तक भारत का बाहरी कर्ज 6.2 अरब डॉलर बढ़ा होता, जबकि असल में ये वृद्धि 11.2 अरब डॉलर दिखी।
सरकार की ओर से खास प्रस्ताव जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों को क्या करना है। इसके लिए दो महीने का समय दिया गया है।
आंध्र प्रदेश शराब घोटाले से जुड़ा ये वीडियो SIT को मिला है। एसआईटी की टीम अब ये पता कराने में लगी हुई है कि आखिर ये वीडियो कब का है?
केंद्रीय बैंक लक्षद्वीप में रुपये-पैसे पहुंचाने के लिए जलमार्ग का इस्तेमाल करता है वहीं नक्सल प्रभावित जिलों में हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर का भी उपयोग करता है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर हो रहा है। यह भारतीय इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर नहीं है।
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