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FY2027 में क्रूड ऑयल और रुपया किस लेवल पर रहेंगे? जानें RBI ने ताजा अनुमान में क्या कहा

 Published : Apr 08, 2026 01:07 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 01:07 pm IST

भारतीय रिजर्व बैंक का यह अनुमान आने वाले वित्त वर्ष में महंगाई, चालू खाता घाटा और मौद्रिक नीति के रुख को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। FY2026 में रुपया पिछले 14 वर्षों में सबसे ज्यादा 9.88% गिरा (पिछला बड़ा रिकॉर्ड FY12 में 12.4% था)।

मार्च 2026 में रुपये पर दबाव और बढ़ गया, जब यह इंट्राडे में 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया।- India TV Hindi
मार्च 2026 में रुपये पर दबाव और बढ़ गया, जब यह इंट्राडे में 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। Image Source : FREEPIK

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY2027) में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि रुपया 94 प्रति डॉलर के स्तर पर रह सकता है। केंद्रीय बैंक ने यह अनुमान अपनी द्विवार्षिक मौद्रिक नीति रिपोर्ट में जारी किया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, रिपोर्ट के अनुसार, FY2027 के लिए कच्चे तेल की कीमत का अनुमान बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है, जो कि FY2026 की दूसरी छमाही में 70 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं, विनिमय दर का अनुमान भी बढ़ाकर 94 प्रति डॉलर कर दिया गया है, जो पहले 88 प्रति डॉलर था।

FY2027 के लिए आरबीआई ने क्या कहा?

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि FY2027 के लिए कच्चे तेल की आधारभूत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल और FY2028 के लिए 75 डॉलर प्रति बैरल मानी गई है, जो ब्रेंट फ्यूचर्स की औसत कीमतों के मुताबिक है। रिपोर्ट में बताया गया कि अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी और यह करीब 63 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी। यह गिरावट OPEC+ द्वारा वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की घोषणा के कारण आई थी। हालांकि, मार्च 2026 में यह रुझान अचानक पलट गया और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के चलते कच्चे तेल की कीमतें नवंबर 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

रुपये में उतार-चढ़ाव

रुपये की बात करें तो अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच इसकी विनिमय दर 87 से 92 प्रति डॉलर के दायरे में रही। अक्टूबर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक रुपया स्थिर रहा और करीब 88 प्रति डॉलर पर कारोबार करता रहा। नवंबर के अंत में रुपये में कमजोरी आने लगी और जनवरी 2026 के दूसरे पखवाड़े में यह लगभग 92 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया। इसके पीछे विदेशी निवेश की निकासी, डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों का कड़ा होना प्रमुख कारण रहे।

भारतीय रुपया में 14 वर्षों की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट 

मार्च 2026 में रुपये पर दबाव और बढ़ गया, जब यह इंट्राडे में 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया, जो पश्चिम एशिया में संघर्ष की चिंताओं के कारण हुआ। FY2026 में भारतीय रुपया पिछले 14 वर्षों की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट दर्ज करते हुए डॉलर के मुकाबले 9.88% कमजोर हुआ। इससे पहले FY2012 में यह 12.4% गिरा था। रुपये में इस तेज गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती प्रमुख कारण रहे। इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और तरलता की कमी ने भी पूरे वित्त वर्ष के दौरान रुपये पर दबाव बनाए रखा।

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