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RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 08, 2026 08:21 am IST,  Updated : Apr 08, 2026 12:29 pm IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला लिया है।

RBI ने रेपो रेट नहीं बदला- India TV Hindi
RBI ने रेपो रेट नहीं बदला Image Source : RESERVE BANK OF INDIA

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने एक बार फिर ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐलान किया कि पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर ही स्थिर रखा जाएगा। ऐसे समय में जब महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ी हुई हैं, RBI का यह फैसला संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में 6 अप्रैल से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद, समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) एवं बैंक रेट 5.5% पर बरकरार रहेंगे। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि आरबीआई ने अपना रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) रखा है, ताकि जरूरत पड़ने पर भविष्य में लचीला रुख अपनाया जा सके।

7.6% रही देश की GDP ग्रोथ

गवर्नर ने देश की अर्थव्यवस्था पर खुशी जताते हुए कहा कि पिछले साल भारत की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा दिखाता है कि मजबूत खपत और निवेश के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। संरचनात्मक सुधारों और अनुकूल वित्तीय स्थितियों ने इस विकास दर को काफी सहारा दिया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट और महंगाई का डर

भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही हो, लेकिन वैश्विक चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं। गवर्नर ने सावधान करते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आया है। सप्लाई चेन में आ रही बाधाएं इस साल की विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इनपुट की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। इसके अलावा, सर्विस सेक्टर में निरंतर तेजी और जीएसटी (GST) के सरलीकरण के सकारात्मक प्रभाव से आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है।

आपकी जेब पर क्या होगा असर?

आरबीआई के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती का इंतजार थोड़ा और बढ़ गया है। चूंकि रेपो रेट स्थिर है, इसलिए बैंक भी फिलहाल लोन की दरों में कोई बड़ी राहत नहीं देंगे। हालांकि, कॉर्पोरेट और वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट भारतीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी।

पिछले साल मिली थी बड़ी राहत

याद दिला दें कि साल 2025 में रिजर्व बैंक ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। लेकिन अब वैश्विक हालात बदल चुके हैं। फरवरी 2026 की बैठक में भी दरों को स्थिर रखा गया था और आज भी उसी रुको और देखो की नीति के जारी रहने की उम्मीद है।

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