अगर आप लोन की किस्त चूक जाने पर रिकवरी एजेंट के फोन कॉल, धमकी या बार-बार की परेशानियों से जूझ चुके हैं, तो अब राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब लोन वसूली के नाम पर बदसलूकी, दबाव और डराने-धमकाने का दौर खत्म होने वाला है।
केंद्रीय बैंक पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो रेट में 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। गवर्नर ने कहा कि जमा पक्ष पर नीति दरों में बदलाव का प्रभाव धीमा रहा है और सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दरों में आगे कमी आएगी।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर और पेमेंट सिस्टम में टेक्नोलॉजी के तेजी से अपनाए जाने को देखते हुए, इन निर्देशों के जारी होने के बाद से मौजूदा निर्देशों की समीक्षा की गई है।
आरबीआई के इस फैसले की वजह से लोन की ब्याज दरें भी जस की तस रहेंगी और ग्राहकों को कोई नहीं राहत नहीं मिलेगी।
आरबीआई ने पिछले साल रेपो रेट में कुल 4 बार कटौती की थी। सबसे पहले, फरवरी 2025 में रेपो रेट 0.25 प्रतिशत घटाया गया था।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का फैसला शुक्रवार, 6 फरवरी को घोषित किया जाएगा।
देश में सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुलियन आयात को लेकर नियमों में सख्ती करते हुए सोना और चांदी मंगाने के लिए एडवांस रेमिटेंस पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद बुलियन कारोबारियों और आयातकों में हड़कंप मच गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस ड्राफ्ट में कहा कि डिविडेंड देने से पहले बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को लॉन्ग टर्म ग्रोथ प्लान और पूंजी की स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
सोशल मीडिया के दौर में एक मैसेज कब अफवाह से “खबर” बन जाए, पता ही नहीं चलता। ऐसा ही एक दावा इन दिनों तेजी से फैल रहा है कि मार्च 2026 से RBI 500 रुपये के नोटों का चलन बंद करने वाला है और एटीएम से भी इन नोटों की निकासी रोक दी जाएगी। जानें क्या है इस खबर की सच्चाई।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नवाचार और वृद्धि को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं की रक्षा करना, विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जो वित्तीय प्रणाली की दक्षता में सुधार करता है, समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
गवर्नर ये स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी।
जनवरी 2026 से देश में चेक क्लियरेंस का सिस्टम पूरी तरह बदलने वाला था। बैंकों को सिर्फ तीन घंटे के भीतर चेक को अप्रूव या रिजेक्ट करना होता और ग्राहकों को पहले से कहीं जल्दी पैसा मिल जाता। लेकिन लागू होने से ठीक पहले RBI ने इस बड़े बदलाव पर अचानक ब्रेक लगा दिया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में 5 बार में 1.25 प्रतिशत की कटौती की। रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में सबसे पहले फरवरी में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत, जून में 0.50 प्रतिशत और फिर दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की।
बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनके जवाब और अतिरिक्त दस्तावेजों की समीक्षा के बाद RBI ने पाया कि उल्लंघन के आरोप सही हैं और इसके लिए आर्थिक दंड लगाना आवश्यक है।
केंद्रीय बैंक ने प्रभावित बैंक के जमाकर्ताओं को बड़ा आश्वासन दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि योग्य जमाकर्ताओं को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियमों के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसका बीमा लाभ मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के सभी प्रतिबंध मंगलवार को बैंक बंद होने के साथ ही लागू हो चुके हैं और अगले 6 महीने तक लागू रहेंगे।
कर्मचारी संघ ने आरबीआई के मुद्रा प्रबंधन विभाग के प्रभारी डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर को लिखे पत्र में कहा कि एटीएम से निकलने वाले ज्यादातर नोट ज्यादा रकम के ही होते हैं।
आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत आरबीआई को मिली शक्तियों के अनुसार यह एक्शन लिया गया है। आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना के कारण भी इन पर कार्रवाई हुई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में इन सिक्कों को भुगतान के रूप में स्वीकार करने की अपील की है और बताया है कि ये सभी सिक्के मान्य हैं। इसको लेकर कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए।
RBI ने नीतिगत दर में कटौती का फैसला ऐसे समय में लिया है जब भारत को अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% की ऊंची टैरिफ दर जैसे वैश्विक आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है।
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