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'भारत को पड़ोसी देश से बहुत कुछ सीखना है...' श्रीलंका की ​ट्रिप पर भारतीय महिला ने क्यों कही ये बात, Video

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jul 12, 2026 06:45 pm IST,  Updated : Jul 12, 2026 06:45 pm IST

सोशल मीडिया पर एक भारतीय महिल की पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इसमें उसने बताया है कि, किन मायनों में श्रीलंका भारत से बेहतर है।

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भारतीय महि ला ने श्रीलंका का बताया माहौल। Image Source : IG/@THERDPLIFE

भारत से हर साल कई यात्री घूमने के लिए विदेश जाते हैं और सब अपने-अपने दृष्टिकोण से उन देशों की भारत से तुलना करते हैं। बजट और शांति का हवाला देते हुए कुछ लोग विदेश में बसने को बेहतर बताते हैं। हालांकि, सांस्कृतिक विरासत और अपनेपन को लेकर कई लोग इस बहस में भारत में रहने को बेहतर बताते हैं। मगर इन दिनों एक भारतीय महिला की पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें रूथ डिसूजा प्रभु ने श्रीलंका की स्वच्छ सड़कों, विनम्र लोगों, सुव्यवस्थित सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के प्रति सम्मान की प्रशंसा करते हुए कहा कि, 'भारत को अपने पड़ोसी देश से बहुत कुछ सीखना है।' 

इंस्टाग्राम पर शेयर की पोस्ट 

इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर @therdplife नामक हैंडल से शेयर किया गया है। महिला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, 'एक भारतीय होने के नाते, श्रीलंका की यात्रा मेरे लिए एक सांस्कृतिक झटका था। सबसे पहले जिस चीज़ ने उनका ध्यान खींचा, वह थी सड़कों की हालत।' उन्होंने बताया कि अपनी सात दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने लगभग 650-700 किलोमीटर का सफर तय किया और उन्हें एक भी गड्ढा नहीं मिला। उन्होंने लिखा, 'सड़कें! हमारी सात दिन की यात्रा में हमने लगभग 650-700 किलोमीटर गाड़ी चलाई। और एक भी गड्ढा नहीं! एक भी नहीं।' उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें सड़क पर किसी तरह का गुस्सा देखने को नहीं मिला। 

लोगों के शांत व्यवहार के बारे में बताया

महिला ने एक घटना का जिक्र किया जिसमें दो वाहन एक संकरी सड़क पर फंस गए थे, जिसके एक तरफ गाड़ियां खड़ी थीं। उन्होंने लिखा, 'जब हमारे टैक्सी ड्राइवर ने खिड़की नीचे की तो दूसरी तरफ से आ रहे ड्राइवर ने भी ऐसा ही किया हमें लगा कि वे हमें गालियां देंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ! वे आपस में मजाक करते हुए एक-दूसरे के बगल से निकले और 5 मिनट में सड़क को साफ कर दिया। हम आश्चर्य से देखते रह गए।' महिला ने पैदल यात्रियों के प्रति देश के सम्मान की भी प्रशंसा की, और कहा कि वाहन चालक लगातार ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर रुककर लोगों को रास्ता देते हैं।' उन्होंने स्थानीय लोगों की दयालुता की भी प्रशंसा की और उन्हें मृदुभाषी, मददगार और अपनी संस्कृति एवं विरासत पर गर्व करने वाले बताया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में लोग आगंतुकों से संवाद करने के लिए सांकेतिक भाषा का भी सहारा लेते हैं, जब उनकी भाषा उनसे मेल नहीं खाती।

समुद्र तटों की भी की तारीफ 

रुथ ने बताया कि, श्रीलंका के समुद्र तटों की स्वच्छता ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया। उन्होंने लिखा, 'समुद्र तट! कहीं भी कागज या प्लास्टिक का एक टुकड़ा भी नहीं। टूटी बोतलों का कोई झंझट नहीं। न ही स्विमसूट पहने लोगों को घूरना पड़ता है, न ही पश्चिमी विदेशियों के साथ सेल्फी लेने की होड़ लगी रहती है।' उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि पर्यटकों को अपने अनुभव का अधिकतम लाभ उठाने में मदद करने के लिए पर्यटन स्थलों और विरासत स्थलों को किस प्रकार व्यवस्थित किया गया था।

'​हम बहुत कुछ सीख सकते हैं'

अपने पोस्ट के समापन में, रूथ ने लोगों को सिविक सेंस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने लिखा, 'एक बहुत बड़े राष्ट्र के रूप में, जो हमारे पड़ोस में ही स्थित है, हम इन बुनियादी बातों से काफी हद तक वंचित रह जाते हैं। हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने और उसे प्रदर्शित करने का असली तरीका यही है। देशभक्ति का दिखावा करने और सोशल मीडिया पर ऑनलाइन बहस करने के बजाय, शुरुआत अपने आस-पास को साफ रखने से करें और दूसरों से इसकी अपेक्षा न करें। हम बेहतर बन सकते हैं।' कैप्शन में, रूथ ने इस यात्रा को यादगार बनाने वाली बातों पर और विचार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा, 'स्वच्छता, दयालुता, सांस्कृतिक गौरव और सद्भावपूर्ण जीवन के मामले में श्रीलंका एक अद्भुत अनुभव था। बेशक, देश ने कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना किया है, लेकिन यहाँ के लोग सबसे दयालु हैं। आर्थिक संकट के बावजूद, यह किसी को भी जिम्मेदार नागरिक होने से मुक्त नहीं करता। लोग बिना किसी संकोच के अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं। एक बेहतर पड़ोसी होने के नाते हम उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। बहुत कुछ।' 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट ने कई यूजर्स को प्रभावित किया, जिनमें से कई ने श्रीलंका की यात्रा के समान अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा, "मैं आपको बता नहीं सकता कि मैं इससे कितना जुड़ाव महसूस करता हूं। मैं बार-बार इसे देखने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं।" 

एक अन्य व्यक्ति ने बताया, "मेरे लिए सबसे बड़ा सांस्कृतिक झटका यह था कि वाहन वास्तव में पैदल यात्रियों को सड़क पार करने देने के लिए रुक जाते थे।"

एक तीसरे यूजर ने लिखा, "श्रीलंका स्वच्छता और शिष्टता का प्रतीक है... यह बिल्कुल अलग ही दुनिया है।"

एक और ने लिखा कि, "बिल्कुल सही! कोलंबो में रहने और द्वीप के चारों ओर घूमने के बाद, इस अद्भुत द्वीप से सीखने के लिए बहुत कुछ है।" 

एक यूजर ने लिखा, "यहां की स्वच्छता, शिष्टता और समग्र शांति वाकई अद्भुत है।"

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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