Wednesday, January 21, 2026
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भारतीय मुद्रा में खलबली, रुपया टूटकर 91.73 के सर्वकालिक निचले लेवल पर, जानिए आज कितना गिरा

आज से पहले रुपये ने बीते 16 दिसंबर 2025 को 91.14 ऑल टाइम लो का रिकॉर्ड बनाया था। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बिकवाली ने भारतीय रुपये को कमजोर किया है।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 21, 2026 04:59 pm IST, Updated : Jan 21, 2026 05:12 pm IST
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस समय अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं। - India TV Paisa
Photo:PEXELS भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस समय अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं।

भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 76 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 91.73 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो अब तक का उसका सर्वकालिक निचला स्तर है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट) और लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपये पर भारी दबाव बना रहा। फॉरेक्स बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपये ने इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को 91.14 का पिछला रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ था। मौजूदा महीने में अब तक घरेलू मुद्रा में करीब 1.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता है।

91.74 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया

विश्लेषकों के मुताबिक, ग्रीनलैंड मुद्दे और संभावित टैरिफ को लेकर यूरोप में बढ़ते तनाव के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में कमजोर रुझान ने भी निवेशकों की धारणा को और प्रभावित किया है। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज बाजार में रुपया 91.05 पर खुला और कारोबार के दौरान फिसलकर 91.74 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। आखिर में यह दिन के आखिर में 91.73 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के मुकाबले 76 पैसे की गिरावट दर्शाता है। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 7 पैसे टूटकर 90.97 पर बंद हुआ था।

अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना

कोटक महिंद्रा एएमसी के हेड-फिक्स्ड इनकम अभिषेक बिसेन ने कहा कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस समय अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीनलैंड विवाद, जिसने अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ाया है और नाटो के कमजोर पड़ने का जोखिम पैदा किया है, साथ ही वेनेजुएला के तेल भंडार को लेकर अमेरिका की भूमिका जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर डाल रहे हैं। बिसेन के अनुसार, भारत के लिए अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता एक अहम स्थिरता कारक हो सकता है, क्योंकि इसके पूरा होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और द्विपक्षीय व्यापार को मजबूती मिलेगी। 

रुपया बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है

बिसेन ने कहा कि जब तक भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होता और व्यापार समझौता साकार नहीं होता, तब तक रुपया बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है। हालांकि, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के चलते भारतीय रिजर्व बैंक स्थिति को संभालने में सक्षम है। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी ने REER आधार पर इसे अपेक्षाकृत सस्ता बनाया है, जिससे निर्यात को सहारा मिल सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत गिरकर 98.61 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 1.88 प्रतिशत गिरावट के साथ 63.70 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

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