बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क की अवधारणा को विद्युत संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। इसे आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को ये जानकारी साझा की। देश में लंबे समय से कर्ज में डूबी और घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों की पृष्ठभूमि में लागत-अनुरूप शुल्क का महत्व बढ़ जाता है। अखिल भारतीय बिजली वितरण कंपनियों के संघ (AIDA) के पहले सालाना सम्मेलन ‘EDICON 2026’ को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति मूल्य श्रृंखला-उत्पादन, पारेषण और वितरण में बिजली वितरण कंपनियां एक अहम कड़ी हैं।
बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान
विद्युत मंत्री ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से ‘बी2सी’ (व्यवसाय-से-उपभोक्ता) सेवाएं प्रदान करती हैं और सेवा गुणवत्ता के साथ अन्य मुद्दों पर ग्राहकों की शिकायतें सबसे पहले इन्हीं के पास आती हैं। मनोहर लाल ने कहा, “हम बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान ला रहे हैं। इसमें बिजली आपूर्ति से जुड़ी सभी लागतों को शुल्क में शामिल किया जाएगा, जिससे बिजली वितरण कंपनियों के घाटे कम होंगे। ये विधेयक संसद के इस बजट सत्र में लाया जा सकता है। इसके सुचारु पारित होने के लिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।’’
विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों से मांगे सुझाव
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में भी बिजली वितरण कंपनियों के घाटे और कर्ज को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान किया गया है। विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों से बुधवार को इस पर सुझाव मांगे हैं। मंत्री ने कहा कि लागत-अनुरूप शुल्क से बिजली वितरण कंपनियों को लाभ कमाने में मदद मिलेगी जिसका उपयोग ‘क्रॉस-सब्सिडी’ के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि ‘क्रॉस-सब्सिडी’ नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि मसौदे में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नुकसान और कर्ज, लागत-अनुरूप न होने वाली दरों तथा अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी’ जैसी समस्याओं से निपटने पर जोर दिया गया है।
क्या होती है क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था
लागत-अनुरूप न होने वाली दर वो होती है जिसमें किसी उपभोक्ता से वसूली गई दर बिजली के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण की औसत लागत से कम होती है। वहीं ‘क्रॉस-सब्सिडी’ ऐसी व्यवस्था है, जिसमें औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं उच्च आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं से लागत से अधिक शुल्क लेकर कृषि उपभोक्ताओं तथा कम आय वाले परिवारों को दी जाने वाली कम दरों की भरपाई की जाती है।



































