विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के दौरान दावोस में दिए गए एक इंटरव्यू में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस दिशा में वॉशिंगटन के लिए हालात “काफी सकारात्मक” बनते जा रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा सीनेट में पेश किए गए उस प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाकर उन्हें दंडित करने की बात कही गई है। इस पर बेसेंट ने कहा कि अब देखना होगा कि यह विधेयक पास होता है या नहीं, और साथ ही उन देशों का जिक्र किया जो इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं।
भारत ने रूसी तेल लेना बंद किया!
बेसेंट ने कहा कि स्पष्ट तौर पर देखें तो चार साल बाद भी यूरोप रूसी तेल खरीद रहा है और अनजाने में खुद के खिलाफ चल रहे युद्ध को ही फंड कर रहा है। भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने धीरे-धीरे अपनी खरीद कम की और अब उसने रूसी तेल लेना बंद कर दिया है। तीसरा बड़ा खरीदार चीन है, जो न सिर्फ रूसी बल्कि ईरानी और वेनेजुएला के तेल का भी बड़ा उपभोक्ता रहा है। हालांकि अब चीन को वेनेजुएला का तेल भी नहीं मिलेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस से तेल खरीदने के मामले में चीन के साथ भी अमेरिका वही सख्त रुख अपनाएगा, तो बेसेंट ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सीनेट में यह विधेयक किस दिशा में जाता है और ईरानी तेल को लेकर क्या फैसला होता है। आखिरकार यह निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप को ही लेना होगा।
विधेयक देशों को दंडित करने का रास्ता खोलेगा
आपको बता दें, इससे पहले इसी महीने सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है। उनके मुताबिक, यह कानून उन देशों को दंडित करने का रास्ता खोलेगा जो सस्ते रूसी तेल की खरीद जारी रखकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने का मजबूत हथियार देगा, ताकि वे रूसी तेल की खरीद बंद करें और यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध के वित्तपोषण पर लगाम लगाई जा सके।






































