दिमित्री पेसकोव से भारत की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिनमें कहा गया था कि रूस एक हफ्ते में भारत को 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने में सक्षम है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों को डर है कि अगर इस रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव (खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष) के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और आपूर्ति की चिंताएं गहरा गई हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया भर की नजरें तेल बाजार पर टिकी हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बिगड़ने की आशंका के बीच रूस ने बड़ा संकेत दिया है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो रूस भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है।
भारत और अमेरिका के बीच बीते दिनों हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद रूस की तरफ से आया यह बयान काफी अहम है। रूस का कहना है कि भारत अपनी नीति पर कायम है।
विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के टॉप अधिकारियों ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को ये जानकारी दी।
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। जहां एक तरफ अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाने का ऐलान किया, वहीं व्हाइट हाउस के एक आदेश ने नई बहस को जन्म दे दिया।
ट्रंप ने अपने आदेश में आगे कहा कि भारत ने ये स्पष्ट किया है कि वो अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि भारत ऊर्जा जरूरतों को लेकर रूस पर निर्भर कभी नहीं रहा है। न ही हमें भारत की ओर से रूसी तेल खरीद बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी रिफाइनरियों ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा देगा।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल का आयात बढ़ाया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने चरणबद्ध तरीके से खरीद घटाई और अब उसने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह रोक दी है।
स्टेट डिपार्टमेंट के एक मेमोरेंडम के आधार पर, अधिकारियों को मौजूदा कानून के अनुसार वीजा देने से मना करना होगा और साथ ही आवेदकों की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन के तरीकों की समीक्षा और फिर से जांच करनी होगी।
अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि जैसे-जैसे टैरिफ का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट फैसला लेना होगा।
भारत ने 2024-25 में 7.45 अरब डॉलर के मत्स्य उत्पाद निर्यात किए, जिनमें से 127 मिलियन डॉलर का निर्यात रूस को किया गया। रूसी मंत्री ने कहा कि भारत और रूस एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए 100 अरब डॉलर तक का लक्ष्य रखा गया है। राजेश शर्मा ने कहा कि यह लक्ष्य मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं।
दुनिया के सबसे धनी लोगों की लिस्ट में रूस के वागिट अलेक्पेरोव अभी 62वें स्थान पर हैं।
रूस की ये सबसे अमीर महिला पहले इंग्लिश टीचर और सात बच्चों की मां थीं। उन्होंने 2004 में ई-कॉमर्स रिटेलर वाइल्डबेरीज़ शुरू किया था। आज उसका दबदबा पूरी दुनिया में है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन की वास्तविक नेटवर्थ का सटीक अनुमान लगाना लगभग असंभव है, लेकिन शीर्ष विशेषज्ञों के अनुमान चौंकाने वाले हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी प्रतिबंधों का पुतिन की कथित निजी संपत्ति पर शायद ही कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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