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रूस के एक फैसले से भारत के एविएशन सेक्टर में हड़कंप! धड़ाम हुए इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयर; 2.5% तक टूटे स्टॉक

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jun 02, 2026 10:10 am IST,  Updated : Jun 02, 2026 10:13 am IST

भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए मंगलवार का दिन झटके वाला रहा। रूस द्वारा जेट फ्यूल के निर्यात पर नवंबर 2026 तक रोक बढ़ाने की खबर सामने आते ही एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई।

इंडिगो और स्पाइसजेट...- India TV Hindi
इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयर्स में बड़ी गिरावट Image Source : CANVA

भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए मंगलवार का दिन अच्छा नहीं रहा। रूस द्वारा एविएशन फ्यूल (जेट ईंधन) के निर्यात पर नवंबर 2026 तक रोक बढ़ाने की खबर सामने आते ही एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। इस खबर का असर सबसे ज्यादा इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों पर पड़ा, जिनमें कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई।

रूस ने अपने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए जेट फ्यूल के निर्यात पर रोक को आगे बढ़ा दिया है। रूस का कहना है कि यह कदम देश के भीतर ईंधन बाजार को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है। हाल के महीनों में रूस की तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों के कारण वहां ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ है।

शेयर बाजार में दिखा असर

इस खबर के बाद निवेशकों ने एविएशन सेक्टर के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। स्पाइसजेट का शेयर करीब 2.5 प्रतिशत टूटकर 12 रुपये के आसपास पहुंच गया। वहीं इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन का शेयर भी 1 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है। ऐसे में जेट फ्यूल से जुड़ी किसी भी वैश्विक खबर पर निवेशक तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।

क्या भारत पर पड़ेगा सीधा असर?

हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस वैश्विक जेट फ्यूल बाजार में बहुत बड़ा खिलाड़ी नहीं है और उसकी हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी बाजार में भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई है। निवेशकों को डर है कि अगर वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं तो एयरलाइन कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे क्या रहेगा फोकस?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल और एविएशन फ्यूल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक सप्लाई सामान्य रहती है तो एयरलाइन कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल रूस के इस फैसले ने एविएशन सेक्टर के निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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