मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों को डर है कि अगर इस रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया भर की नजरें तेल बाजार पर टिकी हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बिगड़ने की आशंका के बीच रूस ने बड़ा संकेत दिया है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो रूस भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है।
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। जहां एक तरफ अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाने का ऐलान किया, वहीं व्हाइट हाउस के एक आदेश ने नई बहस को जन्म दे दिया।
अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।
21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है।
भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर किसी बाहरी दबाव के आगे झुकेगा नहीं। अमेरिकी दबाव और पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बीच इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने रूस से कार्गो यानी तेल के 5 जहाज खरीदे हैं, जो दिसंबर में भारत पहुंचेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।
देश में पेट्रोल और डीजल के दाम भले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हों लेकिन जिस रफ्तार से अमेरिका में ऑयल रिग्स की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है उसे देखते हुए लग रहा है कि सस्ते पेट्रोल और डीजल वाले अच्छे दिन फिर से वापस लौट सकते हैं। अमेरिका में ऑयल रिग्स के बारे में आंकड़े जारी करने वाली संस्था बेकर हग्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ऑयल रिग्स की संख्या 3 साल के ऊपरी स्तर तक पहुंच गई है
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