Wednesday, December 03, 2025
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अमेरिकी प्रतिबंध का असर- भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट, दिसंबर में और कम हो सकता है इंपोर्ट

21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है।

Edited By: Sunil Chaurasia
Published : Dec 02, 2025 06:50 pm IST, Updated : Dec 02, 2025 06:50 pm IST
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Photo:AP अमेरिका ने 22 अक्टूबर को रूस की कंपनियों पर लगाया था प्रतिबंध

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से भारत का रूसी तेल आयात करीब एक तिहाई घट गया है। जानकारों का अनुमान है कि दिसंबर में रूसी तेल के आयात में और भी ज्यादा गिरावट आएगी, क्योंकि भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियां प्रतिबंधों से बचने के लिए दूसरे स्रोतों का रुख कर रही हैं। डेटा विश्लेषण कंपनी केप्लर के अनुसार नवंबर में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन रहा और कुल कच्चे तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से ज्यादा थी। इससे पहले अक्टूबर में ये आंकड़ा 15-16 लाख बैरल प्रतिदिन था। माना जा रहा है कि नवंबर का आयात 5 महीनों में सबसे ज्यादा था, क्योंकि प्रतिबंध लागू होने की समयसीमा 21 नवंबर से पहले आयात बढ़ाया गया।

प्रतिबंध लागू होने से पहले बड़ी मात्रा में स्टॉक कर लिया गया रूसी कच्चा तेल

केप्लर के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ''21 नवंबर से पहले आयात 19-20 लाख बैरल प्रतिदिन के करीब था, क्योंकि खरीदार समयसीमा से पहले माल ला रहे थे। इसके बाद मात्रा कम हो गई। ऐसा लगता है कि रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लागू होने से पहले बड़े पैमाने पर कच्चा तेल स्टॉक कर लिया।'' उन्होंने बताया कि 21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है। रितोलिया ने अनुमान जताया कि मौजूदा लदान और जहाज गतिविधियों के आधार पर दिसंबर में भारत आने वाला रूसी तेल लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन रहेगा। केप्लर ने इससे पहले अनुमान जताया था कि रूसी तेल का आयात 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक कम हो सकता है और फिर स्थिर हो जाएगा।

अमेरिका ने 22 अक्टूबर को रूस की कंपनियों पर लगाया था प्रतिबंध

बताते चलें कि अमेरिका ने 22 अक्टूबर को यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण के लिए क्रेमलिन के संसाधनों को कम करने के लिए रूस की दो सबसे बड़े तेल उत्पादक कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकऑयल पर प्रतिबंध लगा दिया था। रूस ने अक्टूबर में छह करोड़ बैरल कच्चा तेल भेजा, जिसमें रोसनेफ्ट और लुकऑयल का कुल मिलाकर 4.5 करोड़ बैरल का योगदान था। अमेरिका द्वारा रूसी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी तेल का आयात रोक दिया था।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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