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गौतम अडानी को बड़ी राहत, अमेरिकी न्याय विभाग ने सभी आरोप हटाकर केस किया हमेशा के लिए बंद

 Written By: Shivendra Singh
 Published : May 18, 2026 11:34 pm IST,  Updated : May 19, 2026 07:40 am IST

गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने उनके खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामलों को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

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गौतम अडानी को बड़ी राहत Image Source : ANI

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने उनके खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक आरोपों को हमेशा के लिए वापस ले लिया है। इसके साथ ही न्यूयॉर्क में चल रहा हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड केस पूरी तरह बंद हो गया है। यह मामला पिछले साल काफी चर्चा में रहा था और माना जा रहा था कि इससे अडानी ग्रुप की ग्लोबल विस्तार प्लानिंग पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी अदालत ने इस केस को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इसका मतलब है कि अब भविष्य में इसी मामले को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा।

इस मामले में सोमवार को निर्णायक मोड़ आया, जब न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले में अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत से गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ मामले को पूर्वाग्रह सहित खारिज करने का अनुरोध किया। इससे आपराधिक मामला पूरी तरह समाप्त हो गया और इसे दोबारा खोलने की कोई गुंजाइश नहीं रही। लगभग उसी समय, OFAC मामले का निपटारा 275 मिलियन डॉलर में हुआ, जो लगभग 384 मिलियन डॉलर के संभावित मुआवजे से कम था।

क्या थे आरोप?

अमेरिकी एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप ने भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत से जुड़ी प्लानिंग बनाई और विदेशी निवेशकों से कुछ जानकारियां छिपाईं। हालांकि अडानी ग्रुप लगातार इन आरोपों को बेबुनियाद बताता रहा। कंपनी का कहना था कि उसके सभी कारोबारी कामकाज नियमों और कानूनों के अनुसार हुए हैं।

क्यों बंद हुआ मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी जांच एजेंसियों को मामले में पर्याप्त सबूत नहीं मिले। साथ ही यह भी कहा गया कि केस में अमेरिका से जुड़े सीधे लिंक स्पष्ट नहीं थे। DOJ ने अदालत में कहा कि वह अब इस मामले पर और संसाधन खर्च नहीं करना चाहता। इसके बाद कोर्ट ने आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश दे दिया।

SEC और OFAC मामलों में भी मिली राहत

SEC की कार्यवाही, जो समानांतर चल रही थी, पहले ही 18 मिलियन डॉलर में सुलझ गई थी, जिससे अमेरिका में मामले का नियामक पक्ष समाप्त हो गया। ऐसे मामलों में शामिल संगठनों ने करोड़ों डॉलर का भुगतान किया है, जबकि कुछ ने अरबों डॉलर का भुगतान किया है। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि न्याय विभाग की समीक्षा में मामले को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं मिला, क्योंकि इसमें अमेरिका से स्पष्ट संबंध नहीं थे और सबूत अपर्याप्त थे। आरोप विदेशी लेनदेन से जुड़े कथित प्रतिभूति और वायर धोखाधड़ी से संबंधित थे।

LPG आयात से जुड़े OFAC मामले में, अडानी ने समस्या की पहचान होते ही तेजी से कदम उठाए। कंपनी ने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया, डेटा साझा किया और समीक्षा प्रक्रिया के दौरान पूरा सहयोग दिया। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप $275 मिलियन का समझौता हुआ, जिसमें रेगुलेटर्स ने कंपनी के सहयोग, स्वेच्छा से बातचीत करने और सुधारात्मक कदम उठाने की सराहना की।

OFAC ने एक बयान में कहा, "अडानी ने OFAC को काफी सहयोग दिया, जिसमें तेजी से और भारी खर्च पर एक विस्तृत, स्वतंत्र आंतरिक जांच कराना; OFAC की जानकारी मांगने वाली गुजारिशों का तुरंत जवाब देना और कथित उल्लंघनों से संबंधित भारी मात्रा में डेटा उपलब्ध कराना शामिल है।" इसके बाद से अडानी ने LPG आयात का काम बंद कर दिया और अपनी आंतरिक जांच-पड़ताल को और कड़ा कर दिया, जिसमें शिपमेंट से जुड़े जोखिमों पर नज़र रखने का तरीका भी शामिल है।

अडानी ग्रुप के लिए क्यों अहम है फैसला?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अडानी ग्रुप के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनी की छवि और निवेश योजनाओं पर दबाव बना हुआ था। अब केस खत्म होने के बाद समूह को विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इससे कंपनी के ग्लोबल बिजनेस विस्तार को भी गति मिल सकती है।

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