दिसंबर 2025 में रूस से कच्चा तेल खरीदने के मामले में भारत अब तीसरे स्थान पर खिसक गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और पब्लिक सेक्टर की रिफाइनरियों द्वारा कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती की वजह से ऐसा हुआ है। यूरोप के रिसर्च इंस्टीट्यूट सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने मंगलवार को ये जानकारी दी। CREA के अनुसार भारत द्वारा रूस से होने वाला कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने यानी नवंबर के 3.3 अरब यूरो से पूरा 1 अरब यूरो कम है।
अब तुर्की बना रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश
CREA की रिपोर्ट में कहा गया है, ''अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।'' जबकि, चीन अभी भी रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जिसकी रूस के टॉप पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।
भारत ने दिसंबर में रूस से खरीदा 1.8 अरब यूरो का कच्चा तेल
सीआरईए ने कहा, ''भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने दिसंबर में कुल 2.3 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया। भारत की कुल खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 78 प्रतिशत थी, जो कुल 1.8 अरब यूरो रही। इसके अलावा कोयला (42.4 करोड़ यूरो) और तेल उत्पाद (8.2 करोड़ यूरो) आयात किया गया।''
नवंबर में रूस से आयात किया गया था 2.6 अरब यूरो का कच्चा तेल
भारत ने नवंबर में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 2.6 अरब यूरो खर्च किए थे। सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। पब्लिक सेक्टर की ऑयल रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की थी।



































