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रूस से रोज 10.4 लाख बैरल तेल खरीद रहा भारत! मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार की क्या है स्ट्रैटेजी?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 06, 2026 05:49 pm IST,  Updated : Mar 06, 2026 05:49 pm IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों को डर है कि अगर इस रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

रूस से तेल खरीद रहा...- India TV Hindi
रूस से तेल खरीद रहा भारत Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा तेज हो गई है। कई जगहों पर तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत फिलहाल ऊर्जा के मामले में काफी मजबूत स्थिति में है। देश के पास दुनिया के कई हिस्सों से तेल और गैस की आपूर्ति के विकल्प मौजूद हैं, इसलिए किसी एक रूट या क्षेत्र पर पूरी निर्भरता नहीं है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से तेल और गैस खरीदता है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बावजूद भारत की ऊर्जा सप्लाई पर तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है।

रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात

भारत की ऊर्जा रणनीति में रूस की भूमिका काफी अहम हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में भारत ने रूस से रोजाना करीब 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है। रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने की वजह से भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में अलग-अलग देशों से तेल आयात करना भारत के लिए एक सुरक्षित रणनीति साबित हो सकता है।

LPG को लेकर सरकार का भरोसा

एलपीजी यानी रसोई गैस को लेकर भी सरकार ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है। देश में लगभग 33 करोड़ LPG कनेक्शन हैं और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। सरकार ने सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली LPG को भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे रसोई गैस की सप्लाई पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।

LNG सप्लाई को लेकर भी ऑप्शन खुले

LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस के मामले में भी सरकार का कहना है कि भारत के पास कई ऑप्शन मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर गैस की प्रायोरिटी को बदला जा सकता है और अलग-अलग देशों से सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सभी विकल्प खुले रखे गए हैं और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार की नजर

मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अलग-अलग देशों से तेल और गैस की खरीद, घरेलू उत्पादन बढ़ाने की योजना और सप्लाई मैनेजमेंट की रणनीति से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में ऊर्जा की कोई कमी न हो।

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