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जब DM साहब ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाने लगे ट्रिग्नोमेट्री, बच्चों के साथ बेंच पर बैठकर खुद भी बन गए छात्र; देखें VIDEO

 Written By: Malaika Imam
 Published : Sep 30, 2026 06:01 pm IST,  Updated : Sep 30, 2026 06:09 pm IST

रोहतास के डीएम दीपक कुमार मिश्र चॉक लेकर ब्लैक बोर्ड पर पहुंचे और बच्चों को ट्रिग्नोमेट्री पढ़ाने लगे। उन्होंने लंब, कर्ण, आधार के साथ साइन, कॉस और टेन थीटा भी समझाया।

जब डीएम साहब स्कूल में बन गए टीचर।- India TV Hindi
जब डीएम साहब स्कूल में बन गए टीचर। Image Source : REPORTER

बिहार के रोहतास जिले में एक अलग अंदाज देखने को मिला, जब जिले के डीएम खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आए। सासाराम के शेरशाह सूरी इंटरनेशनल विद्यालय में पहुंचे रोहतास के डीएम दीपक कुमार मिश्र ने अचानक क्लासरूम का रुख किया और छात्रों के बीच शिक्षक बनकर ट्रिग्नोमेट्री पढ़ाने लगे।

चॉक लेकर ब्लैक बोर्ड के सामने पहुंच गए DM

डीएम साहब हाथ में चॉक लेकर सीधे ब्लैक बोर्ड के सामने पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने छात्रों को ट्रिग्नोमेट्री के कई टॉपिक समझाए। डीएम ने लंब (Perpendicular), कर्ण (Hypotenuse) और आधार (Base) के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही साइन, कॉस और टेन थीटा पर भी छात्रों से चर्चा की।

आमतौर पर DM को प्रशासनिक कामकाज संभालते हुए देखने वाले छात्रों के लिए यह पल काफी खास रहा। जैसे ही डीएम ने पढ़ाना शुरू किया, क्लास में मौजूद छात्र उत्साहित नजर आए। डीएम ने भी बच्चों के साथ बिल्कुल सहज अंदाज में बातचीत की और उनके सवालों को समझने की कोशिश की।

कुछ देर के लिए खुद भी बन गए छात्र

इतना ही नहीं, डीएम कुछ देर के लिए खुद भी छात्र बन गए। उन्होंने बच्चों के साथ बेंच पर बैठकर क्लास का हिस्सा बने और छात्रों को शिक्षक की भूमिका में कर दिया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ काफी समय बिताया। क्लासरूम के बाद डीएम ने स्कूल की दूसरी व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने विद्यालय की लाइब्रेरी, कंप्यूटर और प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

बच्चों की प्रतिभा की DM ने की तारीफ

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीएम दीपक कुमार मिश्र ने कहा कि विद्यालय के छात्रों में काफी पोटेंशियल है। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों की भी सराहना की और कहा कि शिक्षक काफी निपुण हैं। डीएम ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस विद्यालय के बच्चे बेहतर परिणाम देंगे।

कुल मिलाकर, डीएम साहब का यह अंदाज छात्रों के लिए यादगार पल तो बन ही गया। प्रशासनिक अधिकारी की कुर्सी से निकलकर जब डीएम शिक्षक बने, तो क्लासरूम में पढ़ाई के साथ-साथ उत्साह और संवाद का भी माहौल देखने को मिला।

(रिपोर्ट- रंजन सिंह)

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