बिहार के गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेला के दौरान शिवसेना के संस्थापक स्व. बाला साहेब ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे गया पहुंचीं। मंगलवार को उन्होंने अपने ससुर बाला साहेब ठाकरे और पिता का विधि-विधान से श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गया की पावन धरती पर आकर पितरों का स्मरण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। लंबे समय से गया आने की इच्छा थी, जो गुरु के आशीर्वाद से पूरी हुई। सनातन परंपरा में गया में पितरों का श्राद्ध करने की विशेष मान्यता है। गया के बारे में काफी पढ़ा था लेकिन गया पहली बार आने का मौका मिला है। उन्होंने सनातन धर्म को संस्कृति, कर्तव्य, समाज सेवा और जीवन जीने की परंपरा बताया।
गया की पावन धरती पर बालासाहेब का तर्पण
स्मिता ठाकरे, बाला साहेब के दूसरे बेटे जयदेव ठाकरे की पत्नी हैं। पिंडदान के बाद स्मिता ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिंडदान के बाद हमारा मन बहुत भावुक हो चुका है। जिस तरह से हम पितरों को याद करते हैं तो शायद हम कई पितरों को भूल भी जाते हैं। आज आज जिस तरह से पूजा हुई है, हमें लगता है कि सभी पितरों को याद करके उनके आत्मा को शांति दी है।

'माता सीता की कथा ने बढ़ाया हौसला'
स्मिता ने कहा कि आमतौर पर महिलाओं के पिंडदान करने को लेकर अलग-अलग धारणाएं रही हैं। लेकिन माता सीता की कथा से मुझे इसके लिए प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा, ''मुझे लगा कि महिलाएं पिंडदान नहीं करती हैं लेकिन गया में माता सीता की जब कहानी अपने गुरु से सुनी तो मुझे प्रेरणा मिली और हौसला आया। इस वजह से पिंडदान और तर्पण कर सकी हूं।''
उन्होंने कहा कि गयाजी में माता सीता की ओर से अपने ससुर राजा दशरथ के पिंडदान की धार्मिक मान्यता भी जुड़ी है। बिहार पर्यटन की वेबसाइट भी सीताकुंड को इसी परंपरा से जोड़ती है।

पॉलिटिकल सवाल पर क्या कहा?
मौजूदा राजनीति पर सवाल हुआ तो स्मिता ठाकरे ने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर बताया। उन्होंने कहा कि वे कभी सीधे राजनीति में नहीं रही हैं, हमेशा से समाज सेवा करती आई हैं इससे जिसको भला हो रहा है वह कार्य करती रही हैं और हिंदुत्व का प्रचार हमेशा करती रहेंगीं। राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कहा, आना और जाना हमारे हाथ में नहीं है। समाज सेवा करना हमारे हाथ में है जो कर रहे हैं। कई बार कुर्सी बहुत जरूरी होती है, अगर वह चाहेंगे तो वह भी कर लेंगे।
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गया जी में पिंडदान का महत्व
बता दें कि गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेले के तीसरे दिन अब तक करीब 9 लाख तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं। इस 15 दिनों की अवधि में देश–विदेश से लाखों की संख्या में हिन्दू सनातन धर्मावलंबी आते हैं। यहां आकर अपने पितरों का उद्धार और मोक्ष की प्राप्ति के लिए विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान–तर्पण करते हैं। धार्मिक ग्रन्थों में ऐसी मान्यता है कि गया में पिंडदान तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति और उद्धार होता है।
(रिपोर्ट- अजीत कुमार)
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