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अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ये बड़ा कदम उठाएगी रूसी तेल कंपनी ल्यूकऑयल, 11 देशों में है मौजूदगी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 29, 2025 06:45 am IST,  Updated : Oct 29, 2025 06:45 am IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को की थी नए प्रतिबंधों की घोषणा Image Source : FREEPIK

रूस की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी ल्यूकऑयल ने मंगलवार को कहा कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए नए प्रतिबंधों के जवाब में अपनी अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियां बेचने जा रही है। ल्यूकऑयल ने बयान में कहा कि वो संभावित खरीदारों से बातचीत कर रही है और सौदे 21 नवंबर तक की ‘रियायत अवधि’ के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। हालांकि, जरूरत पड़ने पर कंपनी इस अवधि को बढ़ाने की मांग भी करेगी। ल्यूकऑयल की 11 देशों में स्थित तेल और गैस परियोजनाओं में हिस्सेदारी है। 

डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को की थी नए प्रतिबंधों की घोषणा

ल्यूकऑयल की बुल्गारिया और रोमानिया में रिफाइनरी हैं और नीदरलैंड की एक रिफाइनरी में भी 45 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा कंपनी के पास कई देशों में पेट्रोल पंप का भी जबरदस्त नेटवर्क है। बताते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।

विदेशी बैंकों पर भी द्वितीयक प्रतिबंध लगने का खतरा

इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी कंपनियों को ल्यूकऑयल और रॉसनेफ्ट के साथ कारोबार करने से रोक दिया गया है। इसके साथ ही, विदेशी बैंकों पर भी ‘द्वितीयक प्रतिबंध’ लगने का खतरा है। इन प्रतिबंधों का असर भारत और चीन को रूस से होने वाली तेल बिक्री पर भी पड़ सकता है। भारत के तेल आयात में इन दोनों रूसी कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीद जारी रखने के एवज में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया हुआ है।

भारत में रूसी कंपनियों से कौन खरीदता है सबसे ज्यादा तेल

पिछले हफ्ते की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल आयात में लगभग एक तिहाई हिस्सा रूस का है। रूस ने भारत को इस साल औसतन लगभग 17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का निर्यात किया है। इसमें से लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सीधे रॉसनेफ्ट और ल्यूकऑयल से आया। इनमें से ज्यादातर तेल प्राइवेट रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायरा एनर्जी ने खरीदा था। सरकारी रिफाइनरी कंपनियों की इसमें कम हिस्सेदारी ही रही है।

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