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सदियों पुरानी है सावन माह में विवाहित बेटियों के मायके आने की परंपरा, जानिए क्यों माना जाता है शुभ

 Written By: Arti Azad
 Published : Jul 25, 2026 04:34 pm IST,  Updated : Jul 25, 2026 04:34 pm IST

हिंदू परिवारों में सावन माह पारिवारिक परंपराओं के निर्वाह का भी प्रतीक है। इस दौरान विवाहित बेटियों का मायके आना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। जानें इस परंपरा का महत्व और बेटी के स्वागत से जुड़ी शुभ परंपराएं।

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सावन में बेटी के स्वागत से जुड़ी शुभ परंपराएं Image Source : PINTEREST

सावन का महीना परिवार और रिश्तों को मजबूत करने वाली परंपराओं के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक सदियों पुरानी परंपरा है इस पवित्र महीने में विवाहित बेटियों के मायके आने की। आज भी ज्यादातर भारतीय हिंदू परिवारों में यह परंपरा निभाई जा रही है। सावन में बेटियों के मायके आने की परंपरा के पीछे धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि रहती है और रिश्तों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सावन में क्यों खास है बेटियों का मायके आना? चलिए जानते हैं...

रिश्तों में बढ़ता है अपनापन

सावन भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना के लिए बेहद शुभ है। वहीं, इस पवित्र महीने में कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनका उद्देश्य परिवार में प्रेम, अपनापन और खुशहाली बनाए रखना है। खासतौर पर विवाहित बेटियों का मायके, सदियों पुरानी इस परंपरा को बेहद शुभ माना जाता है। 

कहते हैं कि सावन में बेटी के मायके आने से माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिवारजनों के साथ उसका भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होता है। शादी के बाद जिम्मेदारियों के कारण बेटियां अक्सर मायके कम जा पाती हैं। ऐसे में सावन उन्हें परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों में नई मिठास घोलने का अवसर देता है।

बेटियां लाती हैं बरकत

मान्यता है कि जिन घरों में इस परंपरा का पालन किया जाता है, वहां सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। कई लोग मानते हैं कि बेटी का आगमन घर में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है और परिवार के सौभाग्य में वृद्धि होती है। यही कारण है कि सावन में बेटी के स्वागत को शुभ माना जाता है।

आमतौर पर नवविवाहित बेटियों के लिए यह परंपरा अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसका पालन केवल नई दुल्हन तक सीमित नहीं है। जिन महिलाओं की शादी को सालों बीच चुके हैं, उन्हें भी सावन के दौरान माता-पिता और भाई-भाभी के घर से प्रेम पूर्वक निमंत्रण भेजकर इस परंपरा को निभाया जाता है।

ऐसे करें बेटी का स्वागत

अगर बेटी सावन में मायके आए तो घर की दहलीज पर आरती उतारकर रोली, अक्षत और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद उसके पैर धोकर सम्मानपूर्वक घर में प्रवेश कराएं। घेवर, खीर, मालपुआ या मिठाई से उसका मुंह मीठा कराएं। बेटी के हाथों तुलसी का पौधा लगवाना और उसे सोलह शृंगार की सामग्री भेंट करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार घर आने पर बेटी और ननद को यह उपहार देना मां और भाभियों के लिए बेहद शुभ होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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