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सोलह दिवसीय माता महालक्ष्मी व्रत का समापन इस विधि के साथ करें, घर में बरसेगा धन और सौभाग्य

 Written By: Acharya Indu Prakash,  Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 30, 2026 07:06 pm IST,  Updated : Sep 30, 2026 07:13 pm IST

3 अक्टूबर को सोलह दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन होगा। इस दिन विधिपूर्वक माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से धन-धान्य में बरकत होती है। तो यहां जानिए महालक्ष्मी व्रत समापन पूजा विधि के बारे में।

महालक्ष्मी व्रत 2026- India TV Hindi
महालक्ष्मी व्रत 2026 Image Source : MAGNIFIC

सोलह दिवसीय माता महालक्ष्मी व्रत बीते 19 सितंबर से शुरू हुए थे और 3 अक्टूबर के दिन  शाम के समय देवी मां के पूजन के साथ महालक्ष्मी व्रत संपूर्णा होगा। इस व्रत को करने से घर-परिवार पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं कि महालक्ष्मी व्रत का समापन किस विधि के साथ करना चाहिए। यहां जानिए  महालक्ष्मी व्रत की समापन विधि और सामग्री के बारे में।

महालक्ष्मी व्रत पूजा सामग्री

  • दो सूप
  • 16 मिट्टी के दिये
  • सफेद बर्फी
  • फूल माला
  • तारों को अर्घ्य देने के लिए यथेष्ट पात्र
  • 16 गांठ वाला लाल धागा और 16 चीजें, हर चीज सोलह की गिनती में होनी चाहिए; जैसे 16 लौंग, 16 इलायची या 16 सुहाग के सामान आदि। 

महालक्ष्मी पूजा विधि

शाम को पूजा के लिए सबसे पहले अपने हाथ में वही 16 गांठों वाला लाल धागा बांध लें, जो आपने व्रत के पहले दिन बांधा था। फिर माता महालक्ष्मी के आगे 16 देसी घी के दीपक जलायें और धूपदीप से देवी मां की पूजा करें। साथ ही फूल चढ़ाएं। लेकिन ध्यान रहे देवी मां को कभी भी हरसिंगार का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। महालक्ष्मी की पूजा में हरसिंगार का फूल निषिद्ध है।  फिर एक सूप में सोलह चीजें सोलहसोलह की संख्या में रखकर उसे दूसरे सूप से ढंक दें और उसे माता के निमित्त दान करने का संकल्प करें।  संकल्प के लिए ये मंत्र पढ़ें- क्षीरोदार्णव सम्भूता लक्ष्मीश्चन्द्र सहोदरा। हे क्षीर सागर से उत्पन्न चन्द्रमा की सगी बहन माता महालक्ष्मी मैं यह सब कुछ आपके निमित्त दान कर रहा हूं। इस प्रकार संकल्प लेकर उस सूप को वहीं रखा रहने दें। 

अब दीपक में ज्योति जलाकर माता महालक्ष्मी के मंत्र का जाप कीजिये। मंत्र इस प्रकार है- 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्री ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।' आप पूजा शुरू करने से पहले ही इस मंत्र का अपनी इच्छानुसार संख्या में संकल्प लेकर रखिये। फिर जैसा आपने संकल्प किया हो, उसके हिसाब से मंत्र जप कीजिये। जप के बाद माता महालक्ष्मी की आरती कीजिये और उन्हें सफेद मिठाई का भोग लगाइये। इस प्रकार पूजा आदि के बाद तारों को जल से अर्घ्य दीजिये और आरती कीजिये। इसके बाद, अगर आप विवाहित हैं तो अपने जीवनसाथी का हाथ पकड़कर, अन्यथा स्वयं ही तीन बार उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पुकारिये  हे माता महालक्ष्मी मेरे घर आ जाओ, हे माता महालक्ष्मी मेरे घर आ जाओ, हे माता महालक्ष्मी मेरे घर आ जाओ।

इसके बाद जो व्रती हैं, वो अपने लिए और माता लक्ष्मी के लिए अलग अलग थाली में भोजन निकालिए । अगर आप विवाहित हैं और आपने जोड़े में ये व्रत किया है, तो देवी मां और अपने साथ-साथ अपने जीवनसाथी के लिए भी थाली में भोजन निकालिए। साथ ही हो सके तो माता महालक्ष्मी के लिए चांदी की थाली में भोजन निकालकर रखिये। भोजन करने के बाद अपनी थालियां उठा लें, लेकिन माता की थाली को, किसी दूसरी थाली से ढक्कर वहीं पर रखा छोड़ दें। अगले दिन सुबह माता के लिए निकाली थाली का भोजन किसी गाय को खिला दें और सूप में रखा हुआ दान का सामान किसी लक्ष्मी मंदिर में दान कर दें। इसके अलावा 16 गांठों वाले धागे को अपनी तिजोरी में संभाल कर रख लें। इस धागे को अपने पास रखने से आपके घर में धन धान्य की कभी कमी नहीं होगी और आपके घर की सुख समृद्धि बनी रहेगी।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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