बेंगलुरु के एक कॉलेज छात्र का BMTC बस में अपना पर्स खो जाने का अनुभव शेयर किया है। इस वायरल पोस्ट को पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसकी काफी तारीफ कर रहे हैं। रेडिट पर पोस्ट की गई इस घटना में बस डिपो में हुई एक घटना का जिक्र है, जिसे पढ़कर कई लोग बस कंडक्टर की ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं।
रेडिट पर शेयर किया पोस्ट
इस पोस्ट को रेडिट पर r/bangalore पेज से शेयर किया गया है। रेडिट यूजर ने बताया कि उल्लाला सैटेलाइट टाउन डिपो जाने वाली 234ए BMTC बस में यात्रा करते समय उनका पर्स खो गया। उन्हें अगली सुबह ही पता चला कि पर्स गायब है। वे लिखते हैं कि, 'कल सुबह उल्लाला सैटेलाइट टाउन डिपो जाने वाली 234A बस में मेरा पर्स खो गया। मुझे अगली सुबह ही पता चला कि वह गायब है। मैं कॉलेज का छात्र हूं, इसलिए उसमें सिर्फ मेरा बस पास, मेट्रो कार्ड और थोड़े पैसे थे।' उन्होंने उसी दिन बाद में डिपो जाने और टाइमकीपर के कार्यालय में यह पता लगाने का फैसला किया कि क्या किसी ने इसे जमा कराया है। आगे वे लिखते हैं कि, 'जब मैं पूछताछ कर रहा था, तो एक कंडक्टर ने मेरा चेहरा पहचान लिया और मुझे मेरे नाम से पुकारा। पता चला कि उसे पर्स मिल गया था और वह उसे अपने पास रखे हुए था। उसने कहा कि उसके पास मुझसे संपर्क करने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन उसकी योजना अगले दिन मुख्य डिपो से मेरी संपर्क जानकारी प्राप्त करने की थी, या यदि यह काम नहीं करता है तो वह पर्स मेरे कॉलेज में छोड़ देगा।' छात्र ने अंत में लिखा था, 'अगर आप कभी BMTC बस में कुछ खो देते हैं, तो रूट के मुख्य डिपो पर टाइमकीपर या स्टेशन मास्टर से जरूर संपर्क करें। कर्मचारी और कंडक्टर वास्तव में बहुत मददगार होते हैं।'

यूजर्स ने शेयर किए अनुभव
एक यूजर ने कमेंट्स ने लिखा, 'कंडक्टर का यह व्यवहार बहुत ही दयालुतापूर्ण था। मेरा अनुभव बिल्कुल विपरीत था। बस से उतरने के ठीक दो मिनट बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं अपना पर्स बस में ही छोड़ आया हूं। मैंने बीएमटीसी पोर्टल के माध्यम से शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कुछ नहीं किया जा सका।'
दूसरे यूजर ने बताया कि ऑटो रिक्शा चालक से बार-बार संपर्क करने के बाद ही उन्हें अपना पर्स वापस मिला। लिखा कि, 'वह बार-बार कहता रहा कि आएगा, लेकिन कभी आया ही नहीं। अंत में, मुझे पर्सवापस पाने के लिए 1,500 रुपये देने पड़े। उसमें नकदी नहीं थी, केवल मेरे कार्ड थे। मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा कि इस बारे में कैसा महसूस करूं।'
तीसरे यूजर ने 2019 में अपना फोन खोने की घटना को याद करते हुए लिखा, 'मुझे बस में चढ़ना पड़ा क्योंकि मेरा बाउंस स्कूटर बीच रास्ते में रुक गया था। बाद में मुझे एहसास हुआ कि मेरा वनप्लस 3T फोन गिर गया था। बस कर्मचारियों ने मुझे डिपो ढूंढने में मदद की और मुझे सीट के नीचे से मेरा फोन वापस मिल गया। उस समय मेरी आर्थिक स्थिति तंग थी, इसलिए यह मेरे लिए बहुत मायने रखता था।'
ईमानदारी की यूजर्स ने की तारीफ
इस कहानी ने कई रेडिट यूजर्स के दिलों को छू लिया, जिन्होंने कंडक्टर की ईमानदारी की सराहना की और बीएमटीसी कर्मचारियों के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। एक यूजर ने कमेंट किया, 'वह कंडक्टर बहुत ही दयालु इंसान है।'
दूसरे ने लिखा कि, 'मुझे भी BMTC के कंडक्टर और ड्राइवर से दयालुता का अनुभव हुआ है। उनका काम बहुत कठिन है। मेरी शुभकामनाएं।'
तीसरे ने लिखा कि, 'यह पोस्ट एक ताजगी भरा किस्सा है कि ईमानदारी और दयालुता के कार्य अभी भी रोजमर्रा की जिंदगी में मौजूद हैं, खासकर बेंगलुरु जैसे व्यस्त शहर में।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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