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अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद रूस से कच्चे तेल की खरीद सीमित करेगा भारत, जानें डिटेल्स

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Feb 04, 2026 06:58 am IST,  Updated : Feb 04, 2026 08:17 am IST

हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी रिफाइनरियों ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

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नायरा एनर्जी के लिए बनाया जा सकता खास नियम Image Source : AP

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति के तहत भारत, रूस से कच्चे तेल की खरीद को सीमित करेगा, जिसके बदले व्यापार शुल्क कम किया जाएगा। सूत्रों ने ये जानकारी दी। सूत्रों ने ये भी बताया कि नायरा एनर्जी जैसी रिफाइनरियां, जिनके पास कोई दूसरा वैकल्पिक स्रोत नहीं है, फिलहाल आयात जारी रखेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात घोषणा की थी कि एक व्यापक द्विपक्षीय समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं के आयात पर जवाबी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। 

राष्ट्रपति ने क्या कहा? 

राष्ट्रपति ने कहा कि ये भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने, अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ अवरोधों को कम करने और समय के साथ 500 अरब डॉलर की अतिरिक्त अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य वस्तुओं की खरीद की प्रतिबद्धता जताने के बाद हुआ है। 

घोषणा से पहले किए गए खरीद समझौतों के तहत पूरा होगा लेनदेन

ये भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी, 2022 में युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद रूसी तेल रियायती दरों पर उपलब्ध होने के कारण भारतीय रिफाइनरियां दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रूसी तेल खरीदार बन गईं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां घोषणा से पहले किए गए खरीद समझौतों का पालन करना जारी रखेंगी, लेकिन इसके बाद नए ऑर्डर नहीं देंगी। 

कई भारतीय कंपनियों ने तत्काल प्रभाव से बंद कर दी थी रूसी तेल की खरीद

उन्होंने बताया कि जहां हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी (HMEL) जैसी रिफाइनरियों ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था। वहीं इंडियन ऑयल (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी अन्य कंपनियां भी अपनी खरीद धीरे-धीरे कम करेंगी। भारत की सबसे बड़ी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल के अंत में रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीद रोक दी थी। 

नायरा एनर्जी के लिए बनाया जा सकता खास नियम

इस नियम का एकमात्र अपवाद नायरा एनर्जी हो सकती है। रूस से संबंध होने के कारण नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन द्वारा प्रतिबंध लगाए गए (रोसनेफ्ट की नायरा में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है)। इन प्रतिबंधों के कारण, कोई भी अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ व्यावसायिक लेन-देन करने को तैयार नहीं है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी को प्रतिबंधित इकाइयों से अलग कंपनियों से रूसी तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, नायरा निकट भविष्य में गैर- प्रतिबंधित इकाइयों से रूसी तेल की खरीद जारी रख सकती है। उन्होंने बताया कि दिसंबर में हुई बातचीत के दौरान अमेरिकी व्यापार अधिकारियों को रिफाइनरी की अनूठी स्थिति के बारे में समझाया गया था और नायरा को 'रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंध' नीति से छूट दी जा सकती है या इसके लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई जा सकती है। 

25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क घटकर हुआ 18 फीसदी

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि भारत पर 'जवाबी शुल्क' 25 प्रतिशत के बजाय 18 प्रतिशत (तत्काल प्रभाव से) लागू किया जाएगा। ये अधिकांश आसियान अर्थव्यवस्थाओं (सिंगापुर को छोड़कर) पर लगाए गए 19 प्रतिशत और बांग्लादेश पर लगाए गए 20 प्रतिशत से मामूली रूप से कम है। रूसी तेल से संबंधित अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हटा दिया जाएगा, क्योंकि भारत कथित तौर पर रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है।

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