रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसके पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को लेकर अपना रुख बदल लिया है। मंत्रालय ने बताया कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए लाभकारी है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती है। यह बयान अमेरिका के उस दावे के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि नई दिल्ली ने रूसी कच्चे तेल के आयात को बंद करने पर सहमति जताई है।
'हमें कोई वजह नहीं दिखती'
खबर के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि हमें कोई वजह नहीं दिखती कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद पर अपना रुख बदला है। भारत की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। अमेरिका के दावों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान नए नहीं हैं। उनका कहना था कि अमेरिका स्वतंत्र देशों को निर्देश देने का अधिकार अपने हाथ में लेना चाहता है।
अमेरिका ने टैरिफ किया कम
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी। इसमें वह 25% अतिरिक्त टैरिफ भी हटाया गया, जो पिछले साल अगस्त में भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। पिछले सप्ताह रुबियो ने दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।
रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया
हालांकि, नई दिल्ली पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऊर्जा खरीद में “राष्ट्रीय हित” ही मार्गदर्शक सिद्धांत होगा। इसके अलावा, रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह भारत और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए टैरिफ, प्रतिबंध और अन्य दबावकारी उपायों का उपयोग कर रहा है। प्रवक्ता ज़खारोवा ने यूक्रेनी शासन के यूरोपीय सहयोगियों की भी आलोचना की और कहा कि वे शांति समाधान की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।






































