देश का इनकम टैक्स सिस्टम अब तक व्यक्ति को इकाई मानकर चलता आया है, न कि परिवार को। शादी के बाद भी पति-पत्नी को अलग-अलग टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है, भले ही घर का खर्च, निवेश और भविष्य की प्लानिंग एकसाथ हो। लेकिन अब इस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यूनियन बजट 2026 से पहले टैक्स एक्सपर्ट्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था ICAI ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो शादीशुदा परिवारों के लिए टैक्स का पूरा गणित बदल सकता है।
ICAI का कहना है कि शादीशुदा जोड़ों को यह चुनाव करने की आज़ादी मिलनी चाहिए कि वे टैक्स अलग-अलग भरें या एक साथ। यानी पति और पत्नी चाहें तो अभी की तरह पर्सनल टैक्स सिस्टम में रह सकते हैं, या फिर जॉइंट टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इस व्यवस्था में दोनों के पास अलग-अलग PAN कार्ड होना जरूरी होगा और दोनों की कमाई को जोड़कर नए और अलग टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स तय किया जाएगा।
कैसे बदलेगा टैक्स स्लैब?
प्रस्तावित स्ट्रक्चर के मुताबिक, जॉइंट टैक्सेशन में बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट को दोगुना किया जा सकता है। यानी 8 लाख रुपये तक की दोनों की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। वहीं, 30 फीसदी का टॉप टैक्स स्लैब 48 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर लागू हो सकता है। इससे उन परिवारों को बड़ा फायदा मिल सकता है, जहां एक ही व्यक्ति कमाने वाला है या एक साथी की आय बहुत कम है।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
जॉइंट टैक्स सिस्टम से सिंगल इनकम फैमिली, रिटायर्ड कपल्स और वे परिवार लाभान्वित होंगे, जहां नॉन-अर्निंग स्पाउस की टैक्स छूट अब तक बेकार चली जाती है। साथ ही होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स पर डिडक्शन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। एक्सपर्ट का मानना है कि इससे टैक्स प्लानिंग आसान होगी और इनकम स्प्लिटिंग जैसे जटिल तरीकों की जरूरत भी घटेगी।
क्या सभी के लिए फायदेमंद होगा?
हालांकि जॉइंट टैक्सेशन हर कपल के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता। जिन दंपतियों की दोनों आय काफी ज्यादा है, उनके लिए संयुक्त आय ऊंचे टैक्स स्लैब या सरचार्ज में पहुंच सकती है, जिससे टैक्स बोझ बढ़ सकता है।