टेक सेक्टर से जुड़ी इंडस्ट्रीज की मांग है कि बजट भारत को AI कंज्यूमर से ग्लोबल इनोवेशन हब में बदलने में मदद करेगा और इसके लिए वित्त मंत्री से कुछ ऐलानों की अपेक्षा है।
आगामी बजट में सरकार से इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और MSME सेक्टर्स पर विशेष ध्यान देने की उद्योग जगत ने मांग की है। उनका यह भी मानना है बजट में निर्यात को मजबूत समर्थन देना आवश्यक है।
महंगाई और बढ़ती निर्माण लागत के दौर में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए बजट 2026 राहत भरी खबर लेकर आ सकता है। माना जा रहा है कि इस बार का बजट आर्थिक विकास को गति देने पर केंद्रित होगा, जिसमें विनिर्माण के साथ-साथ आवास क्षेत्र के लिए भी बड़े ऐलान संभव हैं।
बजट 2026 से देश के टेक्नोलॉजी सेक्टर की भी कुछ खास मांगें हैं जिनके पूरा होने पर भारत के AI कंज्यूमर से AI ग्लोबल लीडर बनने की राह खुल सकती है।
सरकार बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए नए हथियारों और गोला-बारूद की खरीद और टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती है। चालू कारोबारी वर्ष में देश का ड़िफेंस बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये है।
बजट 2026 से पहले टैक्स विशेषज्ञ और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कह रहे हैं कि शादीशुदा जोड़ों को एक साथ देखा जाना चाहिए और उनकी टैक्स फाइलिंग भी मिलकर होनी चाहिए। इसी वजह से जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम पर चर्चा शुरू हो गई है, जो शादीशुदा जोड़ों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कंप्यूटिंग पावर के लिए डेटा सेंटर की जरूरत होती है तो बजट में इस पर खासा फोकस रहने की जरूरत है जिससे एआई को कंप्यूटिंग पावर का पूरा फायदा मिले और देश का तकनीकी जगत फले-फूले।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा ने बताया कि जीएसटी सुधारों के बाद पेट्रोल कारों की कीमतों में कमी आई है, जिससे शुरुआती स्तर की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ गया है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए टैक्स-फ्री छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना चाहिए।
भारत में UPI जितना तेजी से बढ़ा है, उतना ही कमजोर इसका कमाई मॉडल रहा है। सरकार की जीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) पॉलिसी ने डिजिटल पेमेंट को हर गली-मोहल्ले तक पहुंचाया, लेकिन हर UPI ट्रांजैक्शन पर करीब 2 रुपये का खर्च बैंकों और फिनटेक कंपनियों को खुद उठाना पड़ रहा है।
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 के तहत लगाए जाने वाले ओआईडी उपकर को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद 1 मार्च, 2016 से विशिष्ट दर के बजाय 20 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क में बदल दिया गया था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 11.21 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा था।
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी बजट 2026 में सामने आ सकती है। लंबे समय से कर्मचारियों की ओर से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग उठ रही है और अब संकेत मिल रहे हैं कि इस बार बजट में इसे बढ़ाने का ऐलान किया जा सकता है।
जब भी देश के आम बजट का जिक्र होता है, तो लोगों की नजर टैक्स, महंगाई, सब्सिडी और सरकारी स्कीम पर टिक जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला बजट कब पेश किया गया था और उस दौर में देश की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
यूनियन बजट 2026 से पहले देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। बीते कुछ सालों से सरकार का साफ संदेश रहा है कि मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स की जेब में ज्यादा पैसा बचे, ताकि खपत बढ़े और इकोनॉमी को रफ्तार मिले।
बजट प्रिंटिंग की अंतिम और सबसे गोपनीय चरण की शुरुआत पारंपरिक ‘हलवा’ समारोह से होती है। यह समारोह अगले सप्ताह (जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में) होने की संभावना है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 कृषि को केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के बजाय आर्थिक विकास के मजबूत इंजन के रूप में स्थापित करने का एक खास मौका है।
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