महंगाई के इस दौर में रिटायर्ड कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता पेंशन है। सालों तक सेवा देने के बाद मिलने वाली रकम अगर रोजमर्रा के खर्च भी पूरे न कर पाए, तो बुजुर्गों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे में यूनियन बजट 2026 से पहले एक बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से लंबित पड़ी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर अब सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, बजट में या उसके तुरंत बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े पेंशनधारकों के लिए बड़ा ऐलान हो सकता है।
फिलहाल EPFO के तहत आने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। हैरानी की बात यह है कि बीते 11 वर्षों से इस राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस दौरान महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि मौजूदा समय में 1000 रुपये की पेंशन किसी भी तरह से व्यवहारिक नहीं है।
कर्मचारी संगठनों की मांग
इसी मुद्दे को लेकर 6 जनवरी को भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री से मुलाकात की थी। बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को मजबूती से रखा गया, जिस पर मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए उचित विचार का भरोसा दिया। इसके अलावा अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,000 से 10,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग दोहराई है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला
मामला सिर्फ सरकार तक ही सीमित नहीं है। न्यूनतम पेंशन से जुड़ा मुद्दा इस समय सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस फैसला ले सकती है। जानकारों का मानना है कि बजट 2026 इस मामले में टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
EPFO की नई पहल
इसी बीच EPFO अपनी सेवाओं को और आसान बनाने की तैयारी में भी जुटा है। संगठन ‘सुविधा सहायक’ तैनात करने की योजना बना रहा है, ताकि सदस्यों को पेंशन, पीएफ क्लेम, अकाउंट लिंकिंग और अन्य प्रक्रियाओं में मदद मिल सके। ये सहायक एक तय शुल्क पर सदस्यों को सेवाएं देंगे, जिससे बुजुर्ग पेंशनधारकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।



































